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हरेक समाज व परिवार में घर तोड़ने वाली होती है मंथरा, समझदारी से सावधान रहने की आवश्यकता

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हरेक समाज व परिवार में घर तोड़ने वाली होती है मंथरा, समझदारी से सावधान रहने की आवश्यकता

हरेक समाज व परिवार मेंं कोई न कोई पुरुष व महिला मंथरा की भूमिका में होते हैं. मंथरा घर परिवार को तोड़ने का काम करती है. ऐसे में समझदार होने और सावधान रहने की आवश्यकता है. भगवान श्रीराम पर मंथरा का कोई असर नहीं दिखा, जबकि मर्यादा पुरुषोत्तम राम व भगवान बने. उक्त बातें पंडित रघुनंदन ठाकुर ने शनिवार को कही. मौका था बूढ़ानाथ मंदिर परिसर में मानस सद्भावना सम्मेलन के छठे दिन के प्रवचन का. पंडित रामस्वरूप उपाध्याय ने कहा कि मानस के सात कांड जीवन के साथ सोपान के समान है. बालकांड से जीवन प्रारंभ होता है और संघर्ष पूर्ण सभी कांड को पूरा करते हुए उत्तरकांड तक पहुंचता है. आगे कहा कि भगवान राम के राज्याभिषेक घोषणा होने पर भगवान राम को बहुत ज्यादा खुशी नहीं हुई उनका मानना था कि चारों भाइयों का जन्म यज्ञोपवीत और विवाह एक साथ हुआ तो केवल हमें राज्याभिषेक क्यों. मंच संचालन सचिव प्रमोद मिश्रा ने किया, तो अतिथियों का स्वागत अध्यक्ष मृत्युंजय प्रसाद सिंह ने किया. चित्रकूट से कन्नौज पीठाधीश्वर अतुलेशानंद जी महाराज प्रो आशा ओझा व पंडित नीलम शास्त्री ने भी प्रवचन किया. आयोजन में सदस्य बिनीता मिश्रा, मनोरमा देवी, संगीत कलाकार सौरभ मिश्रा, महारुद्र मिश्रा, बालमुकुंद, घनश्याम विशेष योगदान रहा. इस मौके पर कोषाध्यक्ष अमरेंद्र कुमार सिन्हा, महामंत्री श्वेता सिंह, सचिव प्रमोद मिश्रा, सुनील चटर्जी, संयोजक हरि किशोर सिंह कर्ण, रत्नाकर झा, प्रणब दास, महेश राय, सुष्मिता दुबे, सौरभ मिश्रा, महारुद्र मिश्रा, बालमुकुंद, घनश्याम प्रसाद आदि उपस्थित थे.

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