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लोकभवन के आदेश पर बनी जांच कमेटी, रजिस्ट्रार पर लगे आरोपों की जांच शुरू

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लोकभवन के आदेश पर बनी जांच कमेटी, रजिस्ट्रार पर लगे आरोपों की जांच शुरू

भागलपुर से आरफीन जुबैर की रिपोर्ट

टीएमबीयू के रजिस्ट्रार प्रो. रामाशीष पूर्वे और नोडल परीक्षा नियंत्रक के बीच हुए विवाद मामले को लोकभवन ने गंभीरता से लिया है. मामले में परीक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ हुए विवाद के दौरान रजिस्ट्रार पर लगे आरोपों की जांच शुरू कर दी गयी है. लोकभवन के निर्देश पर टीएमबीयू के प्रभारी कुलपति प्रो. विमलेंदु शेखर झा ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है. सोशल साइंस की डीन प्रो. कुमारी सुदामा यादव को कमेटी का संयोजक बनाया गया है, जबकि प्रो. इकबाल अहमद और प्रो. पुर्णेंदु शेखर सदस्य हैं. विश्वविद्यालय प्रशासन ने कमेटी से सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा है.टीएमबीयू में 12 मई को विद्यार्थियों के हंगामे के बाद रजिस्ट्रार कार्यालय में नोडल परीक्षा नियंत्रक को वार्ता के लिए बुलाया गया था. वार्ता के दौरान ही रजिस्ट्रार और नोडल परीक्षा नियंत्रक के बीच विवाद हो गया था. उस समय घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था, जो लोकभवन तक पहुंचा था. इसे लेकर नोडल परीक्षा नियंत्रक डॉ. गौतम कुमार यादव, डॉ. बद्रीनाथ झा, डॉ. सरफराज अहमद और डॉ. मनोज कुमार दास ने रजिस्ट्रार पर अमर्यादित भाषा के प्रयोग, सार्वजनिक रूप से अपमानित करने सहित कई गंभीर आरोप लगाते हुए लोकभवन में लिखित शिकायत दर्ज करायी थी.

वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ जांच प्रक्रिया पूरी करने का आदेश

जारी अधिसूचना में विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच कमेटी को निर्देश दिया है कि पूरी जांच प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग करायी जाये और उसका लिखित अभिलेख भी तैयार किया जाए. कमेटी को शिकायत में लगाये गये आरोपों की विस्तृत जांच करने और सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देने को कहा गया है. सात कार्यदिवस के भीतर अपनी रिपोर्ट कुलपति को सौंपने का निर्देश भी दिया गया है. रिपोर्ट में जांच के निष्कर्षों के साथ आवश्यक अनुशंसाएं शामिल करने को कहा गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए. जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.

परीक्षा विभाग के अधिकारियों ने रजिस्ट्रार पर लगाये गंभीर आरोप

नोडल परीक्षा नियंत्रक डॉ. गौतम कुमार यादव ने लोकभवन को भेजी लिखित शिकायत में रजिस्ट्रार के व्यवहार को मनमाना, अपमानजनक और डराने-धमकाने वाला बताया है. उन्होंने आवेदन में 12 मई 2026 को रजिस्ट्रार कक्ष में हुई घटना का विस्तृत विवरण दिया है. शिकायत में कहा गया है कि सीबीसीएस नियमों के तहत 2023-27 सत्र के स्नातक छात्रों को प्रथम और द्वितीय सेमेस्टर के सभी विषयों में उत्तीर्ण हुए बिना पांचवें सेमेस्टर में प्रोन्नति नहीं दी जा रही थी. परीक्षा फॉर्म भरने से रोके जाने के कारण छात्रों में आक्रोश था और 12 मई को विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय में आंदोलन किया था.शिकायत के अनुसार, आंदोलन के बाद रजिस्ट्रार कार्यालय में आयोजित बैठक में छात्र, पुलिसकर्मी और विश्वविद्यालय के कई अधिकारी मौजूद थे. बैठक के दौरान रजिस्ट्रार ने नोडल परीक्षा पदाधिकारियों और परीक्षा विभाग के कर्मचारियों को उत्पन्न स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया. आरोप है कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि यदि विद्यार्थी विश्वविद्यालय में तोड़फोड़ या आगजनी करते हैं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज करायी जाएगी.

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