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Bhagalpur political news इंजीनियर से मंत्री तक का कुमार शैलेंद्र का सफर

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रसिद आलम पहली बार बिहपुर से किसी विधायक को मंत्री बनने का अवसर मिला है. यह उपलब्धि हासिल की है बिहपुर विधायक कुमार शैलेंद्र ने. उनका यह सफर केवल राजनीतिक सफलता की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, जनसेवा, धैर्य और जनता के भरोसे का मिसाल माना जा रहा है. कुमार शैलेंद्र पेशे से इंजीनियर थे. इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब वह भागलपुर आए तो उनका कार्यक्षेत्र काफी अच्छा चल रहा था. पेशेवर सफलता में उनका मन समाजसेवा की ओर आकर्षित होने लगा. धीरे-धीरे उन्होंने खुद को जनसेवा से जोड़ लिया और बिहपुर क्षेत्र में सक्रिय होकर लोगों में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी. सामाजिक कार्यों में वह आम लोगों की समस्याओं को समझने लगे और क्षेत्र की जरूरतों को करीब से महसूस किया. जनसेवा के क्रम में उन्होंने कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों से जुड़ कर राजनीति की बारीकियों को समझना शुरू किया. जनता में लगातार सक्रिय रहने से उनकी पहचान एक जुझारू और सरल स्वभाव के नेता के रूप में बनने लगी. इस दौरान उन्हें लोक जनशक्ति पार्टी से चुनाव लड़ने का अवसर मिला, लेकिन पहली बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इस हार ने उन्हें कमजोर नहीं किया बल्कि राजनीति में और अधिक सक्रिय होने की प्रेरणा दी. उन्होंने भाजपा से जुड़ने का निर्णय लिया और संगठन के लिए पूरी निष्ठा से काम में जुट गये. उस समय बिहपुर विस कांग्रेस, राजद और वाम दलों का मजबूत गढ़ माना जाता था. ऐसे राजनीतिक माहौल में भाजपा के लिए जमीन तैयार करना आसान नहीं था. कुमार शैलेंद्र ने लगातार मेहनत जारी रखी. भाजपा ने उन पर भरोसा जता चुनावी मैदान में उतारा. चुनाव में वह जीत हासिल नहीं कर सके, लेकिन वर्तमान गोपालपुर विधायक सह मंत्री से बेहद कम अंतर से हार गये. इस चुनाव की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि पहली बार भाजपा को बिहपुर में इतने बड़े स्तर पर जनसमर्थन मिला. हार के बावजूद जनता का भरोसा जीत चुके कुमार शैलेंद्र की मेहनत और लोकप्रियता को देख भाजपा ने वर्ष 2010 में एक बार फिर उन्हें प्रत्याशी बनाया. इस बार उन्होंने इतिहास रचते हुए बिहपुर विस में भाजपा का भगवा झंडा लहरा दिया. विधायक बनने के बाद उन्होंने विकास कार्यों को अपनी प्राथमिकता बनाया. उनके कार्यकाल में बिहपुर विस में रिकॉर्ड स्तर पर सड़क निर्माण और आधारभूत संरचना के विकास का काम हुआ. पांच वर्षों में बिहार में सबसे अधिक सड़क निर्माण कार्य बिहपुर क्षेत्र में हुए, जिससे गांव-गांव की तस्वीर बदलने लगी. वर्ष 2015 के चुनाव में जातीय समीकरणों और राजनीतिक परिस्थितियों से उन्हें राजद प्रत्याशी वर्षा रानी से हार का सामना करना पड़ा. इस हार से वह जनता से दूर नहीं हुए. उन्होंने अपने राजनीतिक और सामाजिक संपर्क को और मजबूत किया तथा लगातार क्षेत्र में सक्रिय बने रहे. जनता में उनकी उपस्थिति और कार्यशैली ने लोगों का विश्वास बनाये रखा. परिणाम वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिला, जब जनता ने उन्हें भारी बहुमत से दोबारा विधायक बनाया. उन्होंने क्षेत्र में विकास की नयी दिशा तय करने की बात कही. 2025 के चुनाव के दौरान उन्होंने जनता से कहा कि सड़क, पुल और पुलियों का निर्माण काफी हो चुका है, अब शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ा काम करने की जरूरत है. जनता ने उनके इस विजन पर भरोसा जता रिकॉर्ड मतों से विजयी बनाया. लगातार बढ़ती लोकप्रियता, संगठन के प्रति निष्ठा और जनता के बीच मजबूत पकड़ की गूंज आखिरकार पार्टी नेतृत्व तक पहुंची. यही कारण है कि अब उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल कर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गयी है. बिहपुर की जनता इसे अपने क्षेत्र के सम्मान और विकास की नयी उम्मीद के रूप में देख रही है. लोगों का मानना है कि मंत्री बनने के बाद कुमार शैलेंद्र अब न सिर्फ बिहपुर बल्कि पूरे नवगछिया क्षेत्र के विकास को नयी दिशा देने का काम करेंगे.

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