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धन से अधिक कीमती ज्ञान है, गलती किसी को अच्छा फल नहीं देती

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धन से अधिक कीमती ज्ञान है, गलती किसी को अच्छा फल नहीं देती

धन से अधिक कीमती ज्ञान है. गलती कभी किसी को अच्छा फल नहीं देती है. निष्ठावान व्यक्ति ही, पद, प्रतिष्ठा पाता है. खोटे कार्य मात्र बोलने में ही नहीं, छोड़ने में भी अच्छे लगने चाहिए. जिसका जमीर ही बिकाऊ है, वो व्यक्ति अमीर कैसे हो सकता है. अज्ञानी लोग सही निर्णय नहीं ले पाते हैं. तोता रटंत ज्ञान नहीं, ज्ञान का भ्रम है. जिंदगी में ज्ञान, अनुभव ही काम आता है. यदि पाप हमें बुरे न लगे, तो हम कैसे धर्मात्मा हैं. उक्त बातें मुनिराज विभंजन सागर महाराज ने बुधवार को प्रवचन करते हुए कही. श्री चंपापुर दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र में भगवान नमिनाथ ज्ञान कल्याणक महोत्सव में वे प्रवचन कर रहे थे. इससे पहले पद यात्रा कर सम्मेद शिखर से मंदार होते हुए संघ सहित मुनिराज विभंजन सागर जी महाराज का आगमन सिद्धक्षेत्र में हुआ. मंदिर में भगवान नमिनाथ की प्रतिमा का श्रद्धालुओं द्वारा 108 कलशों से महामस्तकाभिषेक किया गया. बंगलुरु के रवि काशलीवाल ने स्वर्ण कलश से एवं भोपाल के कैलाश कटारिया ने रजत कलश से मस्तकाभिषेक किया. झुकना हारना नहीं, बल्कि सुकून का रास्ता है : साध्वी सौम्य नंदिनी पूज्य आर्यिका साध्वी सौम्य नंदिनी माता ने कहा कि गहरी आस्था बिना किसी भी चीज का रास्ता नहीं मिलता है. अन्याय करेंगे, तो घोर दुख पाएंगे. आदर्श जीवन अच्छाइयों से बनता है. जहां सेवा भाव होगा, वहां संतोष होगा. बुरी परिस्थितियों से डरोगे तो कैसे उस पर विजय पाओगे. झुकना, हारना नहीं है, बल्कि सुकून का रास्ता है. श्रद्धालुओं का स्वागत सिद्धक्षेत्र मंत्री सुनील जैन ने किया और कहा कि आपका ज्ञान ही आपका परिचय है. अपने विचारों को उन्नत रखें. भगवान नमिनाथ के उपदेश में जीवन विकास के सूत्र हैं. मौके पर सांगली के सुशांत रारा, दिल्ली के आकाश जैन, इचलकरंजी के यश पहाड़िया, उज्जैन के अभिषेक गंगवाल, कोटा के सलिल सेठी, जयपुर के अमित सरावगी, हंसमुख भाई, राम जैन, आलोक जैन आदि उपस्थित थे.

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