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bhagalpur news. सामंजस्य बनाना महिला की जिम्मेदारी, लेकिन एकतरफा नहीं

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आदमपुर स्थित प्रभात खबर कार्यालय में आयोजित लीगल काउंसलिंग में युवा अधिवक्ता सुप्रभा कुमारी ने पाठकों को कानूनी सलाह दी. इस दौरान उन्होंने कहा कि परिवार को जोड़कर रखने के लिए सामंजस्य सबसे महत्वपूर्ण आधार है. परिवारों टूटने का सबसे बड़ा कारण आपसी संवाद और समझ का अभाव होता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला सामंजस्य तभी तक स्थापित करे जब तक वह उसकी गरिमा, सुरक्षा और आत्मसम्मान के खिलाफ न जाए. कहा कि अक्सर महिलाएं परिवार बचाने के प्रयास में अपनी आवाज दबा लेती हैं, जो आगे चलकर मानसिक, आर्थिक और कानूनी समस्याओं का कारण बनता है. इसलिए सामंजस्य बनाना महिला की जिम्मेदारी तो है, लेकिन यह एकतरफा नहीं होना चाहिए. बताया कि यदि किसी परिवार में विवाद बढ़ रहा हो, तो दोनों पक्षों को पहले बातचीत और समझौते का प्रयास करना चाहिए. जरूरत पड़ने पर परिवार के बुजुर्ग, पंचायत या कानूनी सलाहकार की मदद ली जा सकती है. घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना, आर्थिक अत्याचार या अवैध दबाव की स्थिति में महिला को समझौते के नाम पर चुप नहीं रहना चाहिए, बल्कि कानून की सहायता लेनी चाहिए. प्रमुख प्रश्न और उसके उत्तर…

मैं जीविका समूह से जुड़ी हूं. पिछले दिनों मेरे खाते में सरकार ने दस हजार रुपया उद्योग करने के लिए दिया. मेरे पति उस रुपए को दूसरे काम में खर्च कर चुके हैं. जब बोलती हूं तो कहते हैं कि तुमको कोई अलग से उद्योग नहीं करना है, मैं तो बिजनेश कर ही रहा हूं. मेरी योजना थी कि मैं दस हजार से अच्छे नस्ल के कुत्तों का पालन करूंगी, लेकिन योजना धरी की धरी रह गयी.

अनामिका, सच्चिदानंद नगर, तिलकामांझी

उत्तर – सरकार द्वारा पैसे व्यवसाय के लिए दिये गये हैं. अगर आपका व्यवसाय सफल होता है तो सरकार की योजना के अनुसार आपको दो लाख रुपये का ऋण भी मिल सकता है. आपके पति को वह रकम आपको दे देना चाहिए. आप उन्हें समझाएं, परिवार के अन्य बुजुर्ग लोगों से भी प्रेशर बनाएं.

मेरी शादी तीन वर्ष पहले हुई है. शादी के बाद मेरे मायके वालों की गलती से कुछ विवाद हो गया था. इसलिए शादी के बाद वह कभी मायके नहीं गयी. अब जो बात हुई थी वो बीत गयी, मैं अपने मायके जाना चाहती हूं, लेकिन मेरे पति विरोध करते हैं. यहां तक कि फोन पर बात करने से भी रोकते हैं.

एक पाठिका, भागलपुर.

उत्तर – पति को समय दें, उन्हें भी समझने की कोशिश करें. मायके जाना आपकी इच्छा और निर्णय पर निर्भर करता है. उम्मीद है कुछ वक्त देने के बाद सब कुछ सामान्य होगा.

मेरे घरवाले शादी के लिए प्रेशर डाल रहे हैं. मैं अभी पांच वर्ष शादी नहीं करना चाहती हूं. मुझे पहले कॅरियर बनाना है. ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए.

दीप्ति, खंजरपुर, भागलपुर.

उत्तर – आपकी इच्छा के खिलाफ आपकी शादी कोई नहीं करवा सकता है. जब अप खुल कर अपनी बातों को रखेंगी तो निश्चित रूप से आपके अभिभावक आपकी बातों को मान लेंगे. उन्हें समझाने का प्रयास करें.

मैं एक लड़के के साथ पांच साल से पति-पत्नी की तरह रह रही हूं. अब लड़के के घरवाले उसकी शादी दूसरी जगह करवाना चाह रहे हैं. लड़का भी घरवालों के पक्ष में आ गया है और मुझे प्रताड़ित करता है. थाने में केस करवा चुकी हूं, अब मुझे क्या करना चाहिए.

संगीता कुमारी, भागलपुर

उत्तर – आप अपने केस में उचित पैरवी करें, निश्चित रूप से आपको न्याय मिलेगा.

मेरी शादी नवंबर माह में हुई है. शादी के बाद पत्नी मायके गई फिर लौट कर नहीं आ रही है. उसे विदाई करने गए तो लड़की के साथ उसके परिजनों ने मारपीट की. अब क्या करना चाहिए जिससे मेरा घर बस जाय.

विकास सिंह, नाथनगर.

उत्तर – आप अपने मामले को फैमली कोर्ट में लेकर जाएं. उम्मीद है अगर दोनों पक्षों की समझ बेहतर होगी तो आपका घर फिर से बस जाएगा.

मेरे खेत के पास एक हॉस्टल है. वहां से पानी खेत में आ जाता है. बार बार प्रबंधन को सूचना दी गयी. हर बार टाल मटोल किया जाता रहा. अब क्या करना चाहिए.

सिद्धार्थ, खड़गिया.

उत्तर – आप अपनी समस्या को लेकर एक आवेदन जिलाधिकारी को दें. निश्चित रूप से आपकी समस्या का समाधान होगा.

एक निजी वाहन से प्रतिबंधित नशीला पदार्थ पुलिस ने बरामद किया है. तस्करी में गाड़ी मालिक की कोई भूमिका नहीं है. क्या गाड़ी मालिक पर भी तस्करी के आरोप में कार्रवाई हो सकती है.

रोहित, नवगछिया.

उत्तर – जब वाहन निजी है तो जांच के दायरे में वाहन मालिक निश्चत रूप से आयेंगे, लेकिन अगर वह निर्दोष है तो छानबीन के बाद पुलिस उसे जरूर राहत देगी.

महिला अगर पीड़ित है तो उसे कहां शिकायत करनी चाहिए, जहां उसके नाम और पहचान को गुप्त रखने की गारंटी हो.

एक पाठक

उत्तर – महिला प्रताड़ना और हिंसा पर कानून बहुत ही सख्त है. प्रत्येक थानों में महिला हेल्प लाइन की व्यवस्था की गयी है. निश्चित रूप से ऐसे मामलों में पुलिस महिला का नाम और पहचान जगजाहिर नहीं करती है.

सतर्कता की साइबर सुरक्षा से बचाव का एकमात्र तरीका

अधिवक्ता ने कहा कि सतर्कता ही साइबर सुरक्षा से बचाव का एक मात्र तरीका है. आज के डिजिटल दौर में अधिकांश धोखाधड़ी मोबाइल, ईमेल, सोशल मीडिया और फर्जी कॉल के माध्यम से की जा रही है. अधिवक्ताओं और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग थोड़ी सावधानी बरतें तो 90 फीसदी साइबर अपराधों से बचा जा सकता है. किसी भी लिंक, ओटीपी, कॉल या अनजान मैसेज पर भरोसा न करें. बैंक, सरकारी विभाग या किसी संस्था द्वारा कभी ओटीपी या पासवर्ड नहीं मांगा जाता. संदिग्ध लेन-देन या धमकी भरे कॉल आते ही तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें. डिजिटल सतर्कता ही सुरक्षित रहने का सबसे प्रभावी उपाय है.

प्रसतुति – ऋषव मिश्रा कृष्णा

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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