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अंगिका के हीरा थे हीरा हरेंद्र : मधुसुदन झा

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अंगिका के हीरा थे हीरा हरेंद्र : मधुसुदन झा

अखिल भारतीय अंगिका साहित्य कला मंच की ओर से शुक्रवार को जयप्रकाश उद्यान में राष्ट्रीय महामंत्री हीरा प्रसाद हरेंद्र के निधन पर शोकसभा हुई. कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष मधुसूदन झा ने की और संचालन गीतकार राजकुमार ने किया. प्रोफेसर मधुसूदन झा ने कहा कि हीरा प्रसाद हरेंद्र अंगिका के प्रथम श्रेणी के साहित्यकार थे. बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे. अंगिका में जितनी भी विधा है, लगभग सभी विधाओं में उनकी लेखनी चली है. अंगिका साहित्य को उनका अमूल्य योगदान सदियों तक याद रहेगा. उनका जाना अंगिका साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति है. कार्यकारी अध्यक्ष गीतकार राजकुमार ने कहा कि हीरा प्रसाद हरेंद्र अपने साहित्य से समाज में हमेशा जीवित रहेंगे. डॉ प्रेमचंद पांडे ने कहा कि हीरा ने अंगिका ही नहीं हिंदी साहित्य को भी बहुत कुछ दिया है.

डॉ जयंत जल्द ने कहा कि दोनों हीं काव्य विधा के अंतर्गत हास्य कवि के तौर पर महान थे. डॉ मनजीत सिंह किनवार ने कहा कि हीरा बाबू सहज हृदय के धनी व्यक्ति थे. उनका जाना हम सबों के लिए एक साहित्यिक अवकाश है. कुमार गौरव ने कहा कि वे आठ महाकाव्यों के के रचयिता थे.

वरिष्ठ छायाकार पारस कुंज ने संस्मरण प्रस्तुत किया. सूरज जायसवाल ने हीरा बाबू की गजल दू दिना के जिंदगी अभिमान कि करना, काल की होतै कि जानों, शान कि करना… गाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी. इस मौके पर कार्यकारी महामंत्री देवेश कुमार, मंटू कुमार, मनजीत कुमार जयसवाल, संजीव कुमार आदि उपस्थित थे.

बुद्ध एक समग्र जीवन पर हुई संगोष्ठी

स्वाभिमान की ओर से शिक्षण संस्थान मंदरोजा में शुक्रवार को बुद्ध जयंती सप्ताह के तहत बुद्ध एक समग्र जीवन विषयक चिंतन संगोष्ठी हुई. अध्यक्षता संस्था के संस्थापक जगतराम साह कर्णपुरी ने की. चिंतन गोष्ठी का उद्घाटन दीप प्रज्वलित कर रंजन कुमार राय ने किया. उन्होंने कहा कि आज से लगभग 2600 वर्ष पूर्व जब समाज और राष्ट्र उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा था, तब बुद्ध के विचार ने शांति का मार्ग स्थापित किया. मानव मात्र के लिए एक सहज ज्ञान स्थापित किया. बुद्ध का विचार कल भी, आज भी और आने वाले समय में भी उतना ही प्रासंगिक है. मुख्य मुख्य अतिथि प्रेम कुमार सिंह थे. इस मौके पर अजय शंकर, गोपाल जी, राजेश झा, दिलीप दास, राजीव रंजन आदि उपस्थित थे.

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