गोपालपुर (भागलपुर) से विपिन ठाकुर की रिपोर्ट
Ganga Erosion Bhagalpur : गंगा नदी के कटाव ने इस्माईलपुर-बिंद टोली क्षेत्र में गंभीर संकट खड़ा कर दिया है. जल संसाधन विभाग द्वारा हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद कटाव की समस्या थमने का नाम नहीं ले रही है. स्थिति यह है कि दर्जनों गांव गंगा की धारा में समा चुके हैं और हजारों एकड़ उपजाऊ भूमि नदी में विलीन हो चुकी है.
Ganga Erosion Bhagalpur : हर साल करोड़ों खर्च, फिर भी जारी है कटाव
सरकारी स्तर पर कटाव रोकने के लिए लगातार बड़े पैमाने पर बजट जारी किया जाता है. कटाव निरोधी कार्य, बाढ़ सुरक्षा और फ्लड फाइटिंग पर हर वर्ष भारी राशि खर्च की जाती है. लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीनी स्तर पर इसका अपेक्षित असर नहीं दिख रहा है.
बरसात शुरू होते ही कई स्थानों पर बोल्डर धंसने, एप्रन क्षतिग्रस्त होने और पिचिंग बह जाने जैसी समस्याएं सामने आती हैं, जिससे योजनाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े होते हैं.
गांवों का विस्थापन और खेती की जमीन का नुकसान
कटाव की वजह से अब तक दर्जनों गांव गंगा में समा चुके हैं. हजारों परिवारों को बार-बार अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है. साथ ही बड़ी मात्रा में उपजाऊ कृषि भूमि भी नदी में विलीन हो चुकी है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है.
गुणवत्ता और निगरानी पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि निर्माण कार्यों में पारदर्शिता की कमी और निगरानी की कमजोरी के कारण योजनाएं सफल नहीं हो पा रही हैं. कई बार जांच के बाद कुछ ठेकेदारों को काली सूची में डाला गया और अधिकारियों पर कार्रवाई भी हुई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान अब भी दूर है.
विशेषज्ञों की राय: सिर्फ अस्थायी उपाय पर्याप्त नहीं
विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा की बदलती धारा और बढ़ते जलप्रवाह को देखते हुए केवल बोल्डर पिचिंग और तटबंध जैसे उपाय पर्याप्त नहीं हैं. इसके लिए नदी प्रशिक्षण (रिवर ट्रेनिंग), वैज्ञानिक तट संरक्षण और दीर्घकालिक रणनीति की आवश्यकता है.
मॉडल स्टडी के बावजूद समाधान अधूरा
बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग ने गंगा कटाव को समझने के लिए पुणे स्थित विशेषज्ञ संस्थान से मॉडल स्टडी भी कराई थी. इसका उद्देश्य वैज्ञानिक आधार पर स्थायी समाधान तैयार करना था, लेकिन प्रभावित लोगों का कहना है कि इसकी सिफारिशें जमीनी स्तर पर पूरी तरह लागू नहीं हो सकीं.
स्थायी पुनर्वास नीति की मांग तेज
कटाव प्रभावित लोगों का कहना है कि हर साल होने वाले भारी खर्च से बेहतर होता कि मॉडल गांव बसाए जाते. ग्रामीणों की मांग है कि सरकार वैज्ञानिक समाधान के साथ-साथ व्यापक पुनर्वास नीति लागू करे, ताकि हर साल विस्थापित होने वाले परिवारों को स्थायी राहत मिल सके.