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लोक नाटक समय के साथ बदल कर हो जाता है प्रासंगिक

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लोक नाटक समय के साथ बदल कर हो जाता है प्रासंगिक

दिशा जन सांस्कृतिक मंच की ओर से रविवार को जयप्रकाश उद्यान में द्वितीय रंग चौपाल का आयोजन किया गया. इसमें लोक रंगमंच के महत्व पर विमर्श का आयोजन हुआ. वरिष्ठ रंगकर्मी सह संयोजक प्रो चंद्रेश ने लोक नाटकों के सामाजिक महत्व की रूपरेखा को स्पष्ट किया और कहा कि लोक नाटक जमीन से जुड़ी हुई चीज है और इसकी प्रवृत्ति शास्त्रीय नाटकों से अलग है. लोक नाटक समय के साथ अपने आप को बदल लेता है और प्रासंगिक हो जाता है. डॉ चैतन्य ने कहा कि जितने भी बड़े नामचीन रंगकर्मी हुए हैं, सभी ने अपने कार्य का मूल आधार लोक रंगमंच ही बनाया है. बिना किसी लिखित दस्तावेज के लोक नाटक मनुष्य धर्म सफर करते आज यहां तक आ पहुंचा है. विनय ने कहा कि लोक नाटकों के तत्वों का इस्तेमाल वर्तमान संदर्भ में अच्छे तरीके से किया जा सकता है. दशरथ ने कहा की ऐसी संगोष्ठियों का आयोजन निरंतर होनी चाहिए और जितनी भी बातें हैं यहां की गई है सब कुछ सार्थक और सही दिशा में है. कार्यक्रम में डॉ चंद्रेश, डॉ चैतन्य प्रकाश, रितेश रंजन, संजीव कुमार दीपू, दशरथ, विनय कुमार और नागेश आदि उपस्थित थे.

मानस सद्भावना सम्मेलन को लेकर भूमिपूजन

बाबा बूढ़ानाथ मंदिर प्रांगण में मानस सत्संग सद्भावना समिति की ओर से रविवार को मानस सद्भावना सम्मेलन को लेकर भूमिपूजन हुआ. 23 से 31 दिसंबर तक विराट मानस सद्भावना सम्मेलन का आयोजन होगा. इसमें कई विद्वान वक्ताओं संतों द्वारा प्रवचन भजन एवं सुंदरकांड महा परायण का आयोजन होगा. कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता में चित्रकूट धाम के जगतगुरु रामस्वरूपाचार्य, उत्तर प्रदेश से नीलम शास्त्री, मध्य प्रदेश से रामेश्वर उपाध्याय, रामपुर से रघुनंदन ठाकुर आदि विद्वानों का प्रवचन होगा. प्रतिदिन संध्या 3:00 बजे से 8:00 बजे तक होगा. भूमि पूजन कार्यक्रम में अध्यक्ष मृत्युंजय प्रसाद सिंह, अमरेंद्र कुमार सिन्हा, हरिकिशोर सिंह कर्ण, रत्नाकर झा, प्रमोद मिश्रा, सुनील चटर्जी सौरभ मिश्रा, महारुद्र मिश्रा आदि उपस्थित थे.

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