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Home बिहार भागलपुर bhagalpur news. तीसरी बार बाढ़ आने के बाद वैकल्पिक फसलों की खेती पर ग्रहण, अब आगत रवी के लिए मिलेगा अनुदान

bhagalpur news. तीसरी बार बाढ़ आने के बाद वैकल्पिक फसलों की खेती पर ग्रहण, अब आगत रवी के लिए मिलेगा अनुदान

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-कृषि विभाग के आकलन के अनुसार जिले में 24 हजार हेक्टेयर में लगी फसल की हुई है बर्बादीप्रदेश सरकार की ओर से बाढ़ से क्षति हुई फसलों के बाद वैकल्पिक फसल लगाने के लिए बीज उपलब्ध कराये जा रहे हैं, मगर भागलपुर में तीसरी बार बाढ़ आने से वैकल्पिक फसल लगाने पर ग्रहण लग गया है. अब आगत रवी फसल को लेकर ही बीज उपलब्ध कराये जायेंगे. कृषि विभाग के आकलन के अनुसार बाढ़ से जिले में 24 हजार हेक्टेयर खड़ी फसल की बर्बादी हुई. उद्यान विभाग की ओर से अब तक किसी तरह का आकलन नहीं किया जा सका है. जिला कृषि पदाधिकारी प्रेमशंकर प्रसाद ने बताया कि गंगा का जलस्तर घटने के साथ ही फसल क्षति का आकलन कर लिया गया था, लेकिन तीसरी बार बाढ़ आने के बाद वैकल्पिक फसल लगाने को लेकर संशय बरकरार है. अब पानी सूखते-सूखते रवी मौसम आ जायेगा. ऐसे में आगत रवी फसल को लेकर बीज उपलब्ध करायें जायेंगे. इसमें तोरिया व उड़द अर्थात कलाई के बीज उपलब्ध कराये जायेंगे. अधिकतर दियारा क्षेत्र में इन बीजों को लगाया जायेगा.

जैविक कोरिडोर को हुई अधिक क्षति, सब्जियां लगाने को किया जायेगा प्रोत्साहित

अधिकतर दियारा क्षेत्र जैविक कोरिडोर में आता है. ऐसे में यहां लगाने के लिए संकर मक्का, मसूर, सरसों, बैंगन, टमाटर, खीरा, गोभी और फूलगोभी के बीज उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भेजा गया है. इससे उन्हें जल्दी और अनुकूल समय में बुवाई करने का मौका मिलेगा. किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, कीटों और बीमारियों से होने वाले फसल नुकसान के खिलाफ बीमा कवर मिलता है. किसानों को तुरंत ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना होगा.सरकार की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे वैकल्पिक फसल के बीजों का उपयोग करके किसान जल्दी ही अपनी खेती दोबारा शुरू कर सकते हैं.

77 पंचायत में बाढ़ से हुई अधिक क्षति

जिले में 77 पंचायतों में बाढ़ का पानी घुसा. इसमें कहलगांव, सबौर, गोराडीह, नाथनगर, शाहकुंड, सुल्तानगंज, पीरपैंती में बाढ़ से फसल की क्षति हुई. सबसे अधिक पीरपैंती व कहलगांव में क्रमश: 17 व 22 पंचायत में बाढ़ के पानी से फसल को क्षति पहुंची. विभाग की ओर से नवगछिया अनुमंडल में बाढ़ से फसल क्षति का आकलन नहीं किया गया है. विभाग का मानना है कि दियारा क्षेत्र व अन्य हिस्सों में प्राय: आपदा आती है. बाढ़ के पानी से उद्यानिक फसल को अधिक क्षति पहुंची है. ऐसे में इन क्षेत्रों को सामान्य क्षेत्र के रूप में दर्शाया गया है.

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