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Home बिहार भागलपुर स्मार्ट सिटी में आवारा पशुओं से बढ़ रहे हादसे, 12 साल बाद भी नगर निगम नहीं बना सका स्थायी व्यवस्था

स्मार्ट सिटी में आवारा पशुओं से बढ़ रहे हादसे, 12 साल बाद भी नगर निगम नहीं बना सका स्थायी व्यवस्था

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स्मार्ट सिटी में आवारा पशुओं से बढ़ रहे हादसे, 12 साल बाद भी नगर निगम नहीं बना सका स्थायी व्यवस्था
आवारा बैल और कुत्तों से हादसे बढ़ रहे हैं.

भागलपुर से ललित किशोर मिश्र की रिपोर्ट

Bhagalpur News: भागलपुर को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिले कई साल हो चुके हैं, लेकिन शहर की एक बुनियादी समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है. शहर की सड़कों पर खुलेआम घूम रहे आवारा बैल और कुत्ते लगातार लोगों की जान और सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं. रोजाना व्यस्त सड़कों, बाजारों और मोहल्लों में इन पशुओं के कारण दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन नगर निगम के पास इन्हें पकड़ने के लिए न तो पर्याप्त संसाधन हैं और न ही इन्हें रखने के लिए कोई स्थायी सेंटर.

सबसे बड़ी बात यह है कि इस समस्या पर पिछले 12 वर्षों से लगातार चर्चा होती रही, लेकिन अब तक कोई ठोस व्यवस्था जमीन पर नहीं उतर सकी है.

स्मार्ट सिटी की सड़कों पर बढ़ रहा खतरा

भागलपुर की मुख्य सड़कों से लेकर बाजारों और रिहायशी इलाकों तक आवारा पशुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. सबसे अधिक परेशानी आवारा बैलों और कुत्तों से हो रही है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार बैल अचानक सड़क पर दौड़ पड़ते हैं, जिससे बाइक सवार और पैदल चलने वाले लोग दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं. वहीं आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं भी लगातार सामने आती रहती हैं.

इसका असर सिर्फ आम नागरिकों पर ही नहीं, बल्कि यातायात व्यवस्था पर भी पड़ रहा है.

12 साल से चर्चा, लेकिन नहीं बनी व्यवस्था

नगर निगम स्तर पर आवारा पशुओं को पकड़ने और उनके रखरखाव के लिए वर्षों से योजनाएं बनती रही हैं. बैठकों में कई बार इस मुद्दे पर चर्चा हुई, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया.

जानकारी के अनुसार बिहार के कई अन्य शहरों में आवारा पशुओं को पकड़ने और रखने के लिए विशेष व्यवस्था की जा चुकी है, लेकिन भागलपुर नगर निगम अब तक ऐसी कोई व्यवस्था विकसित नहीं कर सका है.

यही वजह है कि हर साल समस्या और गंभीर होती जा रही है.

Bhagalpur News: न पकड़ने का उपकरण, न पशु आश्रय केंद्र

सबसे बड़ी चुनौती यह है कि नगर निगम के पास आवारा पशुओं को सुरक्षित तरीके से पकड़ने के लिए आवश्यक उपकरण और प्रशिक्षित व्यवस्था उपलब्ध नहीं है.

इसके साथ ही शहर में ऐसा कोई अधिकृत सेंटर या पशु आश्रय गृह भी नहीं है, जहां पकड़े गए पशुओं को रखा जा सके.

ऐसे में शिकायत मिलने के बाद भी प्रशासन के पास तत्काल कार्रवाई के सीमित विकल्प ही बचते हैं.

पटना: बीएसएससी अभ्यर्थियों ने लंबित परीक्षाओं की तिथि जारी करने की मांग को लेकर आयोग कार्यालय में प्रदर्शन किया. 10-15 दिन में तारीख नहीं आने पर महाआंदोलन की चेतावनी दी.

करोड़ों खर्च, लेकिन इस समस्या का नहीं निकला हल

नगर निगम हर वर्ष विभिन्न विकास योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च करता है, लेकिन आवारा पशुओं की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई प्रभावी पहल नहीं हो सकी है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो दुर्घटनाओं की संख्या और बढ़ सकती है.

विशेषज्ञों का भी मानना है कि स्मार्ट सिटी की अवधारणा केवल सड़कों और भवनों तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा और व्यवस्थित शहरी प्रबंधन भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है.

Bhagalpur News: मेयर ने दिया जल्द कार्रवाई का भरोसा

भागलपुर की मेयर डॉ. बसुंधरा लाल ने स्वीकार किया कि आवारा पशुओं के कारण शहरवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

उन्होंने कहा कि नगर निगम जल्द ही ऐसी एजेंसी के चयन की प्रक्रिया पूरी करेगा, जो आवारा पशुओं को पकड़ने और उनके रखरखाव का कार्य करेगी.

मेयर के अनुसार एजेंसी के चयन के बाद शहर में इस समस्या के समाधान की दिशा में प्रभावी कार्रवाई शुरू की जाएगी, जिससे लोगों को राहत मिल सके.

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अब इंतजार जमीनी कार्रवाई का

फिलहाल शहर के लोग इस घोषणा के बाद वास्तविक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं. पिछले एक दशक से अधिक समय से यह मुद्दा केवल बैठकों और प्रस्तावों तक सीमित रहा है.

यदि एजेंसी का चयन समय पर होता है और पशु आश्रय केंद्र की व्यवस्था बनाई जाती है, तो भागलपुर के लोगों को आवारा पशुओं से होने वाली परेशानी से काफी हद तक राहत मिल सकती है.

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