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Home बिहार भागलपुर आत्महत्या के विचारों से जूझ रहे मरीजों के लिए नई उम्मीद, JLNMCH में आधुनिक उपचार से दिखा सकारात्मक असर

आत्महत्या के विचारों से जूझ रहे मरीजों के लिए नई उम्मीद, JLNMCH में आधुनिक उपचार से दिखा सकारात्मक असर

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आत्महत्या के विचारों से जूझ रहे मरीजों के लिए नई उम्मीद, JLNMCH में आधुनिक उपचार से दिखा सकारात्मक असर
JLNMCH

भागलपुर से अतुल तिवारी की रिपोर्ट

Bhagalpur News:भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (JLNMCH) के मानसिक रोग विभाग में आत्महत्या के विचारों से जूझ रहे एक मरीज के उपचार में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं. विभाग के अनुसार मरीज ने पिछले एक महीने में कई बार आत्महत्या का प्रयास किया था. अस्पताल में भर्ती कर काउंसलिंग, दवाओं और विशेषज्ञों की निगरानी में उपचार शुरू किया गया, जिसके बाद उसकी मानसिक स्थिति में तेजी से सुधार देखा गया. डॉक्टरों का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े ऐसे मामलों में समय पर पहचान और विशेषज्ञ इलाज कई लोगों की जान बचा सकता है.

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कई बार आत्महत्या का प्रयास कर चुका था मरीज

मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. कुमार गौरव के अनुसार मरीज के पिता सोमवार को उसे अस्पताल लेकर पहुंचे थे. परिजनों ने बताया कि पिछले एक महीने के दौरान वह कई बार आत्महत्या का प्रयास कर चुका था.

मामले की गंभीरता को देखते हुए मरीज को तुरंत भर्ती किया गया. इसके बाद विशेषज्ञों की टीम ने काउंसलिंग, आवश्यक दवाओं और आधुनिक उपचार पद्धति के साथ इलाज शुरू किया.

इलाज के बाद मानसिक स्थिति में तेजी से सुधार

मंगलवार को विभाग की ओर से जानकारी दी गई कि उपचार के बाद मरीज की मानसिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है. डॉक्टरों के अनुसार आत्महत्या के विचारों की तीव्रता पहले की तुलना में काफी कम हुई है.

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी आपात स्थितियों में शुरुआती इलाज का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है. समय पर हस्तक्षेप से गंभीर स्थिति को भी नियंत्रित किया जा सकता है.

नई उपचार पद्धति क्यों मानी जा रही है अहम?

डॉ. कुमार गौरव ने बताया कि सामान्य अवसादरोधी दवाओं का असर दिखने में कई सप्ताह लग सकते हैं. लेकिन अब कुछ आधुनिक उपचार पद्धतियां ऐसे चुनिंदा मरीजों में अपेक्षाकृत कम समय में आत्महत्या के तीव्र विचारों को कम करने में मददगार साबित हो रही हैं.

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर मरीज की मानसिक और शारीरिक स्थिति अलग होती है. इसलिए सभी मरीजों में एक जैसे परिणाम मिलना जरूरी नहीं है.

इसे चमत्कारी इलाज नहीं मानें, विशेषज्ञ की निगरानी जरूरी

मानसिक रोग विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह किसी चमत्कारी इलाज का विकल्प नहीं है. इस तरह की आधुनिक उपचार पद्धतियों का उपयोग केवल प्रशिक्षित मनोचिकित्सकों की देखरेख में ही किया जाना चाहिए.

डॉक्टरों के अनुसार प्रभावी उपचार के लिए केवल दवा पर्याप्त नहीं होती. इसके साथ नियमित मनोचिकित्सा, परिवार का सहयोग और लगातार फॉलोअप भी उतना ही जरूरी है.

Bhagalpur News: लक्षण दिखें तो देर न करें

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति में लगातार गहरी निराशा, आत्महत्या के विचार या खुद को नुकसान पहुंचाने जैसी बातें दिखाई दें, तो इसे कमजोरी या सामान्य व्यवहार समझकर नजरअंदाज न करें.

ऐसी स्थिति एक चिकित्सकीय आपात स्थिति हो सकती है. समय पर मानसिक रोग विशेषज्ञ से संपर्क करने और उचित इलाज शुरू करने से कई मामलों में जान बचाई जा सकती है.

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