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बारिश में भींगकर रतजगा कर रहे हजारों बाढ़ पीड़ित, फांक रहे चूड़ा-मूढ़ी

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बारिश में भींगकर रतजगा कर रहे हजारों बाढ़ पीड़ित, फांक रहे चूड़ा-मूढ़ी

– टिल्हा कोठी, बाल निकेतन विद्यालय परिसर, व टीएनबी कॉलेजिएट मैदान में बाढ़ पीड़ित कष्टप्रद जीवन बिता रहे – गंगा का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है. बाढ़ प्रभावित इलाकों से अबतक पानी नहीं उतरा है. शहर से सटे दियारा पर बाढ़ के कारण यहां स्थित रजंदीपुर, बिंदटोली के हजारों लोग टीएमबीयू के टिल्हा कोठी, बाल निकेतन विद्यालय परिसर, किलाघाट व टीएनबी कॉलेजिएट मैदान में आश्रय लिये हुए हैं. इन आश्रय स्थलों में 15 हजार से अधिक बाढ़ पीड़ित अपने मवेशियों के साथ कष्टप्रद जीवन बिता रहे हैं. लगातार हो रही बारिश के कारण कैंप की सतह पर पानी फैल गया है. मजबूरीवश एक साथ कई लोग छोटी सी चौकी पर बैठकर रात काट रहे हैं. बारिश होने से पहले लोग मैदान में प्लास्टिक बिछाकर सो जाते थे. लेकिन तेज हवा व लगातार हो रही रिमझिम बारिश के कारण इनके सामान, मवेशी व परिवार के सदस्य दिनरात भींग रहे हैं. चार आश्रय स्थलों में से सिर्फ बाल निकेतन और टीएनबी कॉलेजिएट में सामुदायिक रसोई चल रही है. शेष टिल्हा कोठी व किलाघाट के लोग पैदल चलकर दोनों जगह खाना खाने आते हैं. टिल्हा कोठी में रह रही विद्या देवी ने बताया कि बारिश में अपने बच्चों को लेकर कहां खाना खाने जायेंगे. दो दिन से चूड़ा मूढ़ी फांक कर जीवन काट रहे हैं. दीवाली तक गांव जाने का रास्ता सूखेगा : रजंदीपुर के सुनील ठाकुर ने बताया कि बाढ़ खत्म होने में अभी 15 दिन है. दीवाली तक गांव का रास्ता सूखेगा. एक महीना अभी खुले आसमान के नीचे ही समय काटना होगा. बारिश में भीगने के कारण बच्चे व मवेशी बीमार पड़ रहे हैं. बाल निकेतन में लगे हेल्थ कैंप के कर्मियों ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों में चर्म रोग समेत सर्दी खांसी व बुखार से पीड़ित कई लोग हैं. जो इलाज कराने आते हैं, उन्हें दवा दी जाती है. दो गर्भवती महिलाओं को नाथनगर रेफरल अस्पताल रेफर किया गया. इधर, टीएनबी कॉलेजिएट में रह रहे बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि स्कूल परिसर में रहने दिया जा रहा है. बारिश से भींग रहे लोगों को राहत मिली. जबकि बाल निकेतन व टिल्हा कोठी में लोग पन्नी के कैंप के नीचे भींग रहे हैं.

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