[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home बिहार भागलपुर भागलपुर का बाबा बटेश्वर नाथ धाम क्यों कहलाता है ‘गुप्त काशी’? जानिए इसकी अनोखी कथा

भागलपुर का बाबा बटेश्वर नाथ धाम क्यों कहलाता है ‘गुप्त काशी’? जानिए इसकी अनोखी कथा

0
भागलपुर का बाबा बटेश्वर नाथ धाम क्यों कहलाता है ‘गुप्त काशी’? जानिए इसकी अनोखी कथा
भागलपुर का बाबा बटेश्वर नाथ धाम

कहलगांव(भागलपुर) की रिपोर्ट

Baba Bateshwar Nath Dham: सावन का महीना शुरू होते ही भगवान शिव के प्राचीन मंदिरों में भक्तों की भीड़ बढ़ने लगती है. भागलपुर जिले के कहलगांव प्रखंड में उत्तरवाहिनी गंगा के तट पर स्थित बाबा बटेश्वर नाथ धाम भी ऐसी ही एक पवित्र नगरी है, जहां आस्था, इतिहास और पौराणिक मान्यताएं एक साथ जीवंत दिखाई देती हैं. इस मंदिर की सबसे बड़ी पहचान इसकी वह लोकमान्यता है, जिसके अनुसार काशी बसाने के समय एक पग भूमि कम पड़ जाने पर काशी को बनारस में स्थापित करना पड़ा और यही स्थान “गुप्त काशी” के नाम से प्रसिद्ध हो गया.

यही वजह है कि सावन के दौरान बिहार, झारखंड और आसपास के राज्यों से हजारों शिवभक्त उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर बाबा बटेश्वर नाथ का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष से गूंज उठता है.

क्यों कहा जाता है इसे ‘गुप्त काशी’?

बाबा बटेश्वर नाथ धाम से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध मान्यता काशी नगरी की स्थापना से जुड़ी है. स्थानीय लोककथाओं के अनुसार जब काशी बसाई जा रही थी, तब एक पग के बराबर भूमि कम पड़ गई. इसके बाद काशी को बनारस में स्थापित करना पड़ा. इसी कारण इस स्थान को “गुप्त काशी” कहा जाने लगा.

आज भी मंदिर आने वाले श्रद्धालु इस कथा को श्रद्धा के साथ सुनते हैं और इसे भगवान शिव की विशेष कृपा से जुड़ा स्थान मानते हैं.

महर्षि वशिष्ठ की तपोभूमि होने की भी मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महर्षि वशिष्ठ ने इसी स्थान पर भगवान शिव की प्रथम पूजा की थी. प्राचीन काल में यह इलाका ऋषि-मुनियों की तपोभूमि और साधना स्थल माना जाता था.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां अनेक संतों और नागा साधुओं ने वर्षों तक तपस्या की थी. यही कारण है कि यह क्षेत्र आज भी साधना और शिव भक्ति का प्रमुख केंद्र माना जाता है.

पटना: बीएसएससी अभ्यर्थियों ने लंबित परीक्षाओं की तिथि जारी करने की मांग को लेकर आयोग कार्यालय में प्रदर्शन किया. 10-15 दिन में तारीख नहीं आने पर महाआंदोलन की चेतावनी दी.

इस मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता

बाबा बटेश्वर नाथ धाम की एक विशेषता इसे अन्य शिव मंदिरों से अलग बनाती है. यहां भगवान शिव के ठीक सामने मां काली की प्रतिमा स्थापित है. ऐसी व्यवस्था बहुत कम शिव मंदिरों में देखने को मिलती है.

मंदिर के आसपास स्थित काशड़ी पहाड़, प्राचीन शिवलिंग और साधना स्थल इसकी धार्मिक गरिमा को और भी बढ़ाते हैं.

विक्रमशिला विश्वविद्यालय से भी जुड़ा है इतिहास

इतिहासकारों के अनुसार बाबा बटेश्वर नाथ धाम से कुछ दूरी पर स्थित प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय में तंत्र विद्या सहित कई विषयों की शिक्षा दी जाती थी.

इसी वजह से इस पूरे क्षेत्र का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व सदियों से बना हुआ है. आस्था और इतिहास का यह संगम हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित करता है.

बिहार की ताजा खबरों के लिए क्लिक करें

सावन को लेकर शुरू हुई तैयारियां

पंचायत के मुखिया अमित सिंह ने बताया कि सावन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं.

मंदिर परिसर की साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं. उत्तरवाहिनी गंगा से जल लेकर आने वाले कांवरियों के लिए भी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि सावन के पूरे महीने बाबा बटेश्वर नाथ धाम का वातावरण पूरी तरह शिवमय हो जाता है और दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु यहां जलाभिषेक कर सुख, शांति और मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं.

इसे भी पढ़ें: अगले 72 घंटे के लिए बिहार के इन जिलों के लोग हो जाएं सावधान, IMD ने जारी किया डबल अलर्ट

बिहार के इन दो जिलों में जमीन के नीचे बनेगी ब्लास्ट-प्रूफ रेल लाइन, जंग में बंकर का करेगी काम

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel