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Home बिहार भागलपुर आर्द्रा नक्षत्र में ‘अमृत’ बनेगी बारिश, धान की बुआई के लिए कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी

आर्द्रा नक्षत्र में ‘अमृत’ बनेगी बारिश, धान की बुआई के लिए कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी

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आर्द्रा नक्षत्र में ‘अमृत’ बनेगी बारिश, धान की बुआई के लिए कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी
बौना कतरनी धान

भागलपुर से दीपक राव की रिपोर्ट

Adra Nakshatra Paddy Farming: भागलपुर जिले और आसपास के मैदानी इलाकों में प्री-मानसून की शुरुआती फुहारों के बाद अब मुख्य खरीफ फसल (धान) की खेती के लिए उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं. रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र के शुष्क बीत जाने के बाद, किसानों के पास धान का बिचड़ा (नर्सरी) तैयार करने का अब आखिरी और सबसे उपयुक्त मौका ‘आर्द्रा नक्षत्र’ है. कृषि वैज्ञानिकों और आचार्यों के मुताबिक, आर्द्रा से लेकर हस्त नक्षत्र तक की अवधि को उत्तम वर्षा और सफल खेती के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है. जिला कृषि विभाग ने भी इस महत्वपूर्ण समय को देखते हुए धान उत्पादक प्रखंडों के किसानों के लिए जरूरी गाइडलाइन जारी की है.

22 जून से 6 जुलाई तक रहेगा आर्द्रा नक्षत्र, 52 दिनों तक झमाझम बारिश के योग

नक्षत्र परिवर्तन और इसके धार्मिक व ज्योतिषीय महत्व के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • सूर्य का गोचर: ज्योतिषाचार्य पंडित शंकर मिश्रा के अनुसार, सूर्य देव 22 जून की रात 8:27 बजे आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं और वे आगामी 6 जुलाई की रात 9:48 बजे तक इसी नक्षत्र में संचार करेंगे.
  • अमृत तुल्य वर्षा: पंडित आनंद मिश्रा ने बताया कि आषाढ़ कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि (22 जून) को सूर्य के आर्द्रा में प्रवेश करते ही पृथ्वी को जीवनदायिनी नमी मिलती है. इस बार सूर्य मिथुन राशि में देवगुरु बृहस्पति के साथ युति बना रहे हैं, जिससे आगामी 52 दिनों तक भारी बारिश के प्रबल योग बन रहे हैं, जो खेती के लिए अमृत समान है.
  • धार्मिक परंपरा: इस नक्षत्र के स्वामी ‘रुद्र’ (भगवान शिव) और ‘राहु’ हैं. वामन पुराण के अनुसार, आर्द्रा को भगवान विष्णु के केशों में निवास करने वाला माना गया है. इस अवधि में भगवान शंकर, विष्णु और सूर्य देव को खीर-पूड़ी व पके आम का भोग लगाने और महिलाओं द्वारा संतान की आरोग्यता के लिए खीर खिलाने की विशेष सनातन परंपरा है.

भागलपुर के 9 प्रखंडों में धान की खेती तेज; कृषि विभाग ने सुझाईं किस्में

जिला कृषि पदाधिकारी अनिल यादव ने बताया कि समय पर उपयुक्त प्रभेद (वैरायटी) की बुआई न करने से पैदावार प्रभावित होती है. जिले के मुख्य 9 धान उत्पादक प्रखंडों—जगदीशपुर, शाहकुंड, सन्हौला, सुल्तानगंज, पीरपैंती, नाथनगर, सबौर, गोराडीह और पीरपैंती में किसानों को निम्नलिखित उन्नत किस्मों के चयन की सलाह दी गई है:

  • कम अवधि की किस्में: सहभागी, सबौर दीप, हर्षित, अभिषेक, सीओ 51, स्वर्ण श्रेया, राजेन्द्र भगवती, राजेन्द्र कस्तूरी और प्रभात.
  • मध्यम अवधि की किस्में: डीआरआर 42, डीआरआर 44, संभा सब-1, एमटीयू 1001, बीपीटी 5204, राजेंद्र श्वेता और सबौर अर्धजल.

Adra Nakshatra Paddy Farming: बुआई से पहले ‘बीज उपचार’ अनिवार्य: पौधा संरक्षण विभाग

Adra Nakshatra Paddy Farming
आर्द्रा नक्षत्र में 'अमृत' बनेगी बारिश, धान की बुआई के लिए कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी 3

फसल को शुरुआती बीमारियों और कीटों से बचाने के लिए पौधा संरक्षण विभाग ने कड़े निर्देश जारी किए हैं.

मिट्टी और बीज जनित फफूंद (Fungal) रोगों से पौधों की सुरक्षा के लिए बिचड़ा डालने से पहले बीजों का रासायनिक या जैविक उपचार (Seed Treatment) अत्यंत आवश्यक है. इसके लिए प्रति किलोग्राम बीज को 2 ग्राम कार्बेन्डाजीम 50 डब्लूपी, अथवा 2 ग्राम थीरम, या फिर 5 ग्राम ट्राइकोडर्मा विरीडी जैविक कवकनाशी से अच्छी तरह उपचारित करने के बाद ही बुआई करें.

कृषि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि आर्द्रा नक्षत्र की शुरुआती मानसूनी बारिश में स्नान करने से इंसानों को त्वचा संबंधी कई विकारों से मुक्ति मिलती है, क्योंकि यह वातावरण की आर्द्रता को संतुलित करता है. किसान भाई मौसम के इस बदलाव का लाभ उठाकर जल्द से जल्द अपने खेतों को बिचड़ा गिराने के लिए तैयार करें.

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