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bhagalpur news. टीएमबीयू के पेंशनरों का निर्णय, कुलपति के समक्ष रखे जायेंगे 40 मामले

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तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के पेंशनरों की लंबित समस्याओं को कुलपति के संज्ञान में लाने के उद्देश्य से पेंशनर संघर्ष मंच की समीक्षा बैठक विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में हुई. संयोजक ने पहली बार मंच की बैठक के लिए सीनेट हॉल उपलब्ध कराने पर विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रति आभार जताया. बैठक में कुल 44 सदस्यों की उपस्थिति रही. सेवांत लाभ और बकाया भुगतान से जुड़े 40 मामलों को दर्ज किया गया, जिन्हें कुलपति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा. पेंशनरों ने संबंधित शाखाओं की कार्यशैली पर रोष व्यक्त किया. उनका कहना था कि कुलपति समस्याओं का त्वरित समाधान चाहते हैं, लेकिन कुछ मातहत कर्मियों द्वारा गलत सूचना देकर यह बताया जाता है कि पेंशनरों की कोई समस्या लंबित ही नहीं है. आरोप लगाया गया कि कुछ कर्मचारी संचिकाएं छिपा देते हैं और यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर भी अनावश्यक पेंच फंसाये जाते हैं, जिससे विश्वविद्यालय को न्यायालय में असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है. सदस्यों ने कुलपति की सराहना करते हुए कहा कि पूर्व कुलपति द्वारा ‘डिस्कस’ लिखकर रोकी गयी सैकड़ों फाइलों का त्वरित निष्पादन किया गया है. हालांकि, कुछ फाइलें साजिशन उनके समक्ष पहुंचने ही नहीं दी जाती हैं. मंच ने पेंशन सेल के पुनर्गठन और उसे सक्रिय बनाने की मांग उठायी. प्रस्ताव दिया गया कि नोडल अधिकारी ऐसे शिक्षक को बनाया जाये, जो ओल्ड पेंशन स्कीम के अंतर्गत आते हों. साथ ही पेंशन सेल में दो पेंशनरों को शामिल करते हुए हर महीने अनिवार्य बैठक आयोजित की जाये. 80 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों ने पेंशन शाखा के निकट एक कक्ष उपलब्ध कराने की मांग की, जहां बैठने और पेयजल की सुविधा हो. इसके अलावा प्रत्येक नवंबर में सशरीर जीवित प्रमाणपत्र देने के बजाय ऑनलाइन व्यवस्था लागू करने की भी मांग की गयी. बैठक की अध्यक्षता प्रो बिहारी लाल चौधरी ने की, जबकि संचालन प्रो पवन कुमार सिंह और अमरेंद्र कुमार झा ने संयुक्त रूप से किया.

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