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Home बिहार बेतिया भोजपुरी कला उत्सव में विरासतन संस्कृति से रुबरु हुई नई पीढ़ी

भोजपुरी कला उत्सव में विरासतन संस्कृति से रुबरु हुई नई पीढ़ी

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भोजपुरी कला उत्सव में विरासतन संस्कृति से रुबरु हुई नई पीढ़ी

बेतिया. भोजपुरी कला उत्सव के दौरान प्रसिद्ध लोक गायक भरत शर्मा व्यास बेतिया पहुंचें और अपनी प्रस्तुति से सब का मन मोह लिया. संस्कार भारती के बारे में उन्होंने कहा कि सामान्य लोग केवल कला को मनोरंजन का साधन समझते हैं. जबकि संस्कार भारती ने कला के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन का जो प्रण लिया है वह अद्भुत है. सामाजिक परिवर्तन के विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि कला ने अब तक भारत को बचाए रखा है. संस्कृति को अगर बचाना है तो कलाकारों को आगे आना पड़ेगा. इस दौरान उन्होंने कई गीत गाये. उन्होंने अपने प्रसिद्ध गीत निमिया के दाढ़ मईया झूलेली झुलनवा गाकर सबको ताली बजाने पर विवश कर दिया. लोगों की मांग पर काली माई बाड़ी हमरा गांव जैसे पुराने गीत गाकर सबका मन मोह लिया. कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कई कलाकारों को सम्मानित किया. कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि व्यवस्था में लगे एक एक व्यक्ति को सम्मानित किया गया. सफाई कर्मी से लेकर द्वारपाल तक को सम्मानित करने की प्रक्रिया के दौरान लोगों ने सबके प्रयास को खूब सराहा. —————- केवल मनोरंजन नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम है कला बेतिया समय के साथ विलुप्त हो रही लोक संस्कृति को बचाने की मुहिम में जुटे संस्कार भारती ने नई पीढ़ी को भोजपुरी समाज की विरासतन संस्कृति से अवगत करा दिया. बेतिया में आयोजित दो दिवसीय कला महोत्सव के जरिये नई पीढ़ी अपने पुरानी परंपरा से रुबरु हुई. महोत्सव में आये भोजपुरिया क्षेत्र के विद्वानों ने युवाओं को लोक कला संस्कृति की सीख दी. कहा कि, युवाओं के कंधे पर भोजपुरिया क्षेत्र के पुरातन संस्कृति को संजोए रखने की बड़ी जिम्मेदारी है, इसके लिए उन्हें आगे आना होगा. आगत अतिथियों और कार्यक्रम में भाग लेने वालों के लिए जो प्रतीक चिन्ह आए थे वें सब आरा की एक संस्था से लिए गए थे जहां दिव्यांगजन मिलकर उसे बनाते हैं. लकड़ी की सुंदर कलाकृति पर कार्यक्रम का लिखा हुआ नाम लोगों को खूब भाया. इतना ही नहीं, महाराष्ट्र से थैले लाये गये थे, जिसे बुनकर खूब मेहनत करके बनाते हैं.

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