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चंबल के बाद घड़ियालों की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाली नदी बनी गंडक

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चंबल के बाद घड़ियालों की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाली नदी बनी गंडक

हरनाटांड़. बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में भारत–नेपाल सीमा से होकर बहने वाली गंडक नदी अब चंबल नदी के बाद घड़ियालों की दूसरी सबसे बड़ी आबादी को सहारा देने वाली नदी बन गई है. वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया ( डब्लूटीआई) और बिहार सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के संयुक्त प्रयासों से गंडक नदी में घड़ियालों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है.अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2015 में जहां गंडक नदी में घड़ियालों की संख्या मात्र 54 थी, वहीं 2025 तक यह बढ़कर लगभग 400 हो गई है.इस प्रकार दस वर्षों में आबादी में करीब 588 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से होकर बहने वाली गंडक नदी जलीय जीवों के लिए अनुकूल आवास उपलब्ध कराती है, जिससे घड़ियाल संरक्षण को बल मिला है.वेस्ट चंपारण के कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स एवं फील्ड डायरेक्टर नेशामणि के.ने बताया कि बेहतर प्रबंधन और संरक्षण उपायों के कारण गंडक में घड़ियालों की संख्या प्रतिवर्ष 20–22 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है.2015 से 2025 के बीच वाल्मीकिनगर से सोनपुर तक 326 किलोमीटर के क्षेत्र में 944 घड़ियाल शावकों को नदी में छोड़ा गया है.इसके साथ ही बड़े और छोटे घड़ियालों की कुल संख्या एक हजार से अधिक हो गई है.गंडक घड़ियाल रिकवरी प्रोजेक्ट के सह-प्रोजेक्ट अन्वेषक समीर कुमार सिन्हा ने बताया कि गंडक नदी ने घड़ियाल संरक्षण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है.वर्ष 1975 में इसी नदी से एकत्र किए गए अंडों से ओडिशा के टिकरपाड़ा में भारत का पहला कैप्टिव ब्रीडिंग कार्यक्रम शुरू हुआ था.आज IUCN ने गंडक को दुनिया के छह प्रमुख घड़ियाल हैबिटैट में शामिल किया है.विशेषज्ञों के अनुसार, गंडक नदी में घड़ियालों की यह सफलता दर्शाती है कि यदि राजनीतिक, सहभागी और स्थल-विशेष संरक्षण प्रयास किए जाएं, तो गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों को भी पुनर्जीवित किया जा सकता है.

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