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शिवनगर के समीप उत्तरायण बह रही गंगा बनी खतरनाक

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शिवनगर के समीप उत्तरायण बह रही गंगा बनी खतरनाक

बलिया. बलिया का दियारा क्षेत्र वर्षों से गंगा नदी से होने वाले कटाव का दंश झेलने को विवस है. आजादी के बाद कई सरकारे आयी, व्यवस्था भी बदली, लेकिन दियारा क्षेत्र में गंगा नदी से होने वाले कटाव को रोकने की दिशा में ठोस पहल नहीं होने से दियारा क्षेत्र के लोगों में हाल के कुछ वर्षों से भय का माहौल बना हुआ है. इस वर्ष नवंबर माह में गंगा नदी से हो रहे कटाव किसी आश्चर्य से काम नहीं है. लोग अनहोनी के डर से सहमे हुये हैं. बताया जाता है कि शनिवार की सुबह शिवनगर गांव के समीप अचानक गंगा नदी से कटान शुरू हो गया. देखते ही देखते 50 मीटर की जमीन गंगा नदी में समा गयी. जिससे अब लोगों के घरों की दूरी महज 10 से 5 मीटर बची हुई है. लोग अपने-अपने घरों से जरूरी सामानों को खाली कर पलायन करने लगे हैं. इस अनहोनी पर सभी चकित हैं. गांव के बुजुर्गों का कहना है कि कई बार कटाव हुआ. जो जलस्तर में वृद्धि के दौरान अमूमन जुलाई से सितंबर माह तक होती है. लेकिन इस बार जिस तरह से नवंबर माह में कटाव शुरू हुई है. इससे तो यह लगने लगा है कि यह किसी बड़ी अनहोनी की ओर संकेत कर रहा है. बुजुर्गों ने बताया कि अब तो आस ही छूट गयी है कि किसी के घर बचेंगे. सभी को विस्थापन का शिकार होना पड़ेगा. लोगों ने बताया कि विगत वर्ष 10 करोड़ से अधिक की लागत से शिवनगर से कुतलूपुर की ओर पूरब दिशा में करीब 500 मीटर में कटाव निरोधक कार्य कराये गये थे. जो अगस्त महीने में आई बाढ़ में विलीन हो जाने के बाद लगातार रह रहकर कटाव जारी है. समय रहते इसे नहीं रोका गया तो आने वाले दिनों में गांव के सभी घर गंगा में विलीन हो जाएंगे. शिवनगर के ग्रामीण रामानुज राय, उमाकांत झा, सच्चिदानंद पासवान, कमली भगत, दिलीप पोद्दार, श्रीराम राय, कार्तिक साह, गोरेलाल साह आदि ने बताया कि चार दिन पूर्व शिवनगर डीह के समीप भी कटाव होने के कारण करीब 50 मीटर में कटाव निरोधी कार्य गंगा में विलीन हो गये हैं. साथ ही शिवनगर डीह से डाउन में भी करीब 300 मीटर कार्य बाढ़ के दौरान गंगा में समा गया. जिसे समय रहते दुरुस्त करने की जरूरत है. नहीं तो कब गंगा की धारा विकराल रूप धारण कर ले और एक-एक कर ग्रामीणों के घर गंगा में समाने लगेगा यह कहना मुश्किल है. बताया जाता है की गंगा की धारा भवानंदपुर के टिटहियां टोला एवं शिवनगर के बीच उत्तरायण रूप धारण कर लेने के कारण इस तरह का नजारा देखने को मिल रहा है. दक्षिण से सीधा उत्तर की ओर बह रही गंगा की धारा विकराल रूप धारण किये हुये है. हालांकि बाढ़ के दिनों में इस वर्ष कटाव होने पर जल संसाधन विभाग के द्वारा बाढ़ प्रतिरक्षात्मक कार्य कराये गये थे. जिसके बाद से कटाव रुका हुआ था. लेकिन शनिवार की सुबह हुई कटाव से एक बार फिर ग्रामीणों के बीच दहशत का माहौल उत्पन्न हो गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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