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संस्कृत से ही संस्कृति और संस्कार बचेगा : मृत्युंजय

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संस्कृत से ही संस्कृति और संस्कार बचेगा : मृत्युंजय

बीहट. सिद्धाश्रम सिमरिया धाम के प्रांगण में सोमवार को 45 दिवसीय कार्तिक कल्पवास मेला सफलतापूर्वक संपन्न हो गया. इसी के साथ सर्वमंगला के अधिष्ठाता स्वामी चिदात्मन जी महाराज के द्वारा श्रीमद् भागवत कार्तिक महात्म, श्रीमद् देवी भागवत, महा भागवत कथा का भी आज सफलतापूर्वक समापन किया गया. इसके साथ ही ध्वजा उच्छेदन महर्षि चिदात्मन जी महाराज के सान्निध्य में बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा, रविंद्र ब्रह्मचारी, न्यास के निदेशक विजय कुमार झा, सचिव सुधीर चौधरी, उप सचिव प्रो पी के झा प्रेम, मीडिया प्रभारी नीलमणि, कोषाध्यक्ष नवीन प्रसाद सिंह की उपस्थिति में मंत्रोच्चारण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया. इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में संस्कृत बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय झा ने आह्वान किया कि संस्कृत, संस्कृति और संस्कार के लिए जन जागरण अभियान आज के दौर में अति आवश्यक है. संस्कृत से ही संस्कृति और संस्कार बचेगा. उन्होंने स्वामी जी से आग्रह किया कि एक जन जागरण अभियान चलाया जाए जिसमें हम सभी अपनी सहभागीता दें. मौके पर पूरे जिले के मध्य व माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य प्रभारी के साथ एक बैठक सर्वमंगला आध्यात्म योग विद्यापीठ के परिसर में किया गया.बैठक को संबोधित करते हुए मृत्युंजय कुमार झा ने सभी प्राचार्य से आग्रह किया कि संस्कृत और संस्कृति और अपने संस्कारों को बचाने व संस्कृत विद्यालय को बचाने के लिए बिहार सरकार और संस्कृत बोर्ड कृत संकल्पित है. हम सभी अपने संस्कृति के विकास के लिए संस्कृत के पठन-पाठन पर जोर दें क्योंकि यह संस्कृत सिर्फ एक देव भाषा ही नहीं है यह रोजगार का भी मुख्य साधन बन गया है. इसी दरम्यान उन्होंने विद्यालय का निरीक्षण करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की.मुख्य अतिथि श्री झा को मिथिला के पारंपरिक पाग और अंग वस्त्र से सम्मानित किया गया. इस सुअवसर पर पूज्य स्वामी जी ने सभी कार्यक्रम का सफलतापूर्वक संपन्न होने पर सर्वमंगला परिवार ,न्यास परिवार, जिला प्रशासन, मीडिया का आभार प्रकट किया तथा भविष्य में भी सर्वमंगला परिवार और न्यास परिवार के द्वारा आयोजित सभी समारोह में सक्रिय भागीदारी की अपेक्षा की. मौके पर आचार्य नारायण झा, राजेश झा, दिनेश झा, रमेश झा, राजीव कुमार, पवन कुमार, मनोज कुमार, श्याम सनातन, चंद्रभानु देवी, सुनीता देवी, पूनम देवी, विपिन कुमार, राधेश्याम चौधरी, अरविंद चौधरी, राम झा, लक्ष्मण झा, सदानंद झा, हंस झा, ऋषिकेश झा आदि मौजूद थे.

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