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Home बिहार बांका पांडेयडीह काली मंदिर में तीन सौ वर्षों से हो रही है पूजा-आराधना

पांडेयडीह काली मंदिर में तीन सौ वर्षों से हो रही है पूजा-आराधना

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पांडेयडीह काली मंदिर में तीन सौ वर्षों से हो रही है पूजा-आराधना

चांदन. चांदन प्रखंड के चांदन पंचायत के वार्ड नंबर बारह के पांडेयडीह गांव में मां काली की पूजा-आराधना पिछले तीन सौ वर्षों से की जा रही है. पांडेयडीह काली मंदिर एक संकटमोचन के रुप में है. गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि इस इलाके में एक बार बहुत ही भयंकर महामारी हैजा का प्रकोप था. जिसे रोकने के लिये पंडित हरि पाण्डेय द्वारा मां काली का आवाहन कर उनसे इसे रोकने की विनती की. पूजा-प्रार्थना के उपरांत इस इलाके से महामारी थमी, तो उनके द्वारा ही इस गांव में मां काली की स्थापना हुई.

फूस की झोपड़ी से बन गया भव्य मंदिर

यहां पर पूजा करने के लिये पहले एक फूस की झोपड़ी में ही मां की पूजा अर्चना किया गया. उसके बाद यहां पर खपड़ैल मंदिर बनाकर पूजा-अर्चना की जाने लगी. वर्तमान में गांव के भक्तों द्वारा मां काली का भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया. जिसमें मार्बल व टाइल्स अंदर बाहर दीवार सहित में लगाया गया. इस मंदिर की महिमा अपरंपार है. जो भी भक्त मां से सच्चे मन व श्रद्धा भक्ति से मन्नत मांगी जाती है, मां उसे अवश्य पूर्ण करती है. यह मंदिर सुल्तानगंज-देवघर मुख्य सड़क मार्ग पर स्थित है. यहां तीन दिनों तक भव्य मेला का आयोजन किया जाता है. प्रखंड के पांच पंचायतों के लोग पूजा व दंड देने पहुंचते हैं. पाण्डेयडीह सार्वजनिक कालीपूजा पूजा समिति के अध्यक्ष विनोद पांडेय एवं उपाध्यक्ष अरविंद पांडेय द्वारा बताया गया कि यह जो हमारा गांव है, यहां पर सभी देवी-देवताओं को स्थापित किया गया है. इसी मंदिर में शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की भी पूजा समारोहपूर्वक की जाती है. काली मंदिर के पीछे माता शीतल एवं जिया माता का मंदिर है. बगल में महावीर मंदिर भी है, सडक के उस पार बाबा भोलेनाथ एवं मां पार्वती का भी मंदिर है. बगल में बाबा दुबे भयहरण नाथ का भी मंदिर है. उससे आगे दक्षिण काली का मंदिर है, जो विशाल बरगद के पेड़ में है. हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पूजा समिति शांति पूर्ण रूप से सरकार के नियमों का पालन करते हुए पूजा संपन्न करने की पूरी तैयारी कर ली गयी है. पूजा कार्यक्रम को सफल बनाने में सचिव विक्की पांडेय, उप सचिव अमरेंद्र पांडेय, सुभाष पांडेय, निकेश पांडेय, अनिल पांडेय, जयप्रकाश पांडेय, प्रदीप पांडेय सहित सभी ग्रामवासियों का सराहनीय योगदान है.

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