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Home बिहार बांका जीवन में आर्थिक आजादी मिले बिना राजनीतिक आजादी घोखा है

जीवन में आर्थिक आजादी मिले बिना राजनीतिक आजादी घोखा है

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जीवन में आर्थिक आजादी मिले बिना राजनीतिक आजादी घोखा है

प्रगतिशील मिथिला समाज ने दिया एक दिवसीय धरना, सबके सहरसा प्राउटिष्ट सर्व समाज की अगुवाई में भारत के सभी प्रमुख चौवालीस जन गोष्ठी आधारित समाजों का अपने-अपने जिला मुख्यालय पर एक दिवसीय सांकेतिक धरना का आयोजन किया गया. इसी क्रम में जिला मुख्यालय में भी प्रगतिशील मिथिला समाज ने बुधवार को धरना दिया. धरना के माध्यम से जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, एवं मुख्यमंत्री को दस सूत्री स्मार पत्र भेजा गया. धरना को संबोधित करते प्राउटिष्ट सर्व समाज के राष्ट्रीय प्रवक्ता आचार्य रणधीर देव ने कहा कि जब तक सबके जीवन में क्रय शक्ति की गारंटी नहीं मिल जाती, शत-प्रतिशत रोजगार नहीं मिल जाता, स्थानीय संसाधन पर स्थानीय विकास के लिए उपक्रम खड़ा नहीं हो जाता, कृषि को उद्योग का दर्जा नहीं मिल जाता, तब तक राजनीतिक आजादी को धोखा ही माना जायेगा. आज भी भारत का गांव भारत के ही महानगरों में रहने वाले मुट्ठी भर लोगों का उपनिवेश बना हुआ है. इससे मुक्ति मिलने पर ही सही मायने में सबके जीवन में राजनीतिक एवं आर्थिक आजादी नसीब होगी. प्रगतिशील मिथिला समाज के जिला सचिव अधिवक्ता शंकर कुमार ने कहा कि कि भारत की विविधता जन गोष्ठी को लेकर है. जिसमें ऐतिहासिक मिथिला भी एक जन गोष्ठी है. मिथिला के लोगों को मिथिलांचल के ही संसाधन से पूर्ण आत्मनिर्भर बनाना है. यह तब होगा जब मिथिलांचल के संसाधन को कच्चे माल के रूप में बाहर जाने से रोकने का कानून बनेगा. उन्होंने कहा कि मैथिली भाषा को संविधान की अष्टम सूची में शामिल तो कर लिया गया. लेकिन इसे मिथिलांचल की पढ़ाई-लिखाई एवं काम-काज की भाषा नहीं बनाया जा रहा है जो दुखद है. मैथिली भाषा मिथिलांचल के लोगों के आत्मा की भाषा है. बैद्यनाथ चौधरी ने कहा कि मिथिला का अतीत गौरवशाली रहा है. इसे फिर से हासिल करने के लिए मिथिला के भू -भाग को स्वतंत्र सामाजिक-आर्थिक इकाई का वैधानिक दर्जा देना होगा. सभा को अधिवक्ता मृत्युंजय कुमार वात्सल्य, अधिवक्ता अशोक, आनंदी चौधरी, संजीत कुमार, मनोज कुमार, पप्पू देव, अजय यादव, आयुष गुप्ता, चंद्रप्रकाश,पंकज सहित अन्य ने भी संबोधित किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता सुनील कुमार झा एवं धन्यवाद ज्ञापन रंजीत कुमार मेहता ने किया.

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