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Home बिहार बांका बांका में कहीं पेयजल के लिए तरस रहे लोग, तो कहीं सरकारी आवास के पास रोज बह रहा हजारों लीटर पानी

बांका में कहीं पेयजल के लिए तरस रहे लोग, तो कहीं सरकारी आवास के पास रोज बह रहा हजारों लीटर पानी

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बांका में कहीं पेयजल के लिए तरस रहे लोग, तो कहीं सरकारी आवास के पास रोज बह रहा हजारों लीटर पानी

रजौन(बांका) से पीयूष कुमार की रिपोर्ट : बांका जिले के रजौन प्रखंड मुख्यालय में सरकारी लापरवाही की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने जल संरक्षण के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रखंड पदाधिकारी के सरकारी आवास के समीप लगे नल से लगातार पानी बह रहा है और रोज हजारों लीटर पीने योग्य पानी बर्बाद हो रहा है. हैरानी की बात यह है कि इसी रास्ते से प्रतिदिन अधिकारी, कर्मचारी और आम लोग गुजरते हैं, लेकिन समस्या पर अब तक किसी ने ध्यान नहीं दिया.

बीडीओ आवास के पास बह रहा पानी

स्थानीय लोगों के अनुसार जिस नल से लगातार पानी बह रहा है, वह बीडीओ आवास की चहारदीवारी से सटा हुआ है. यह रास्ता प्रखंड मुख्यालय आने-जाने का मुख्य मार्ग भी है, जहां से विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी रोज गुजरते हैं. इसके बावजूद पानी की बर्बादी को रोकने के लिए कोई पहल नहीं की जा रही है. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत कर दी जाए तो हजारों लीटर पानी बचाया जा सकता है.

जल संरक्षण के दावों पर सवाल

एक ओर सरकार जल संरक्षण और जल बचाव को लेकर जागरूकता अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी कार्यालय परिसर के पास ही पानी की खुलेआम बर्बादी हो रही है. ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में अगर कहीं नल खराब मिल जाए या पानी बहता दिख जाए तो संबंधित लोगों को तुरंत फटकार लगाई जाती है. लेकिन जब मामला प्रखंड मुख्यालय और अधिकारियों के आवास से जुड़ा हो, तब जिम्मेदार लोग चुप्पी साध लेते हैं.

पीएचईडी की कार्यशैली पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों ने इसे पीएचईडी विभाग की बड़ी लापरवाही बताया है. लोगों का कहना है कि यदि प्रखंड मुख्यालय में “हर घर नल का जल” योजना की यह स्थिति है, तो गांवों में योजनाओं की हालत का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है. लगातार बहते पानी के कारण आसपास कीचड़ और गंदगी भी फैल रही है, जिससे राहगीरों को परेशानी हो रही है.

लोगों ने की त्वरित कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल खराब नल की मरम्मत कराने और पानी की बर्बादी रोकने की मांग की है. लोगों का कहना है कि जल संरक्षण केवल भाषण और पोस्टरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए.

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