[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home बिहार बांका कचरे के ढेर में सिमटती आस्था : गंदगी की मार से कराह रहा ऐतिहासिक मंदार पर्वत

कचरे के ढेर में सिमटती आस्था : गंदगी की मार से कराह रहा ऐतिहासिक मंदार पर्वत

0
कचरे के ढेर में सिमटती आस्था : गंदगी की मार से कराह रहा ऐतिहासिक मंदार पर्वत
??????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????

संजीव पाठक, बौंसी. बांका जिले का ऐतिहासिक, धार्मिक और पौराणिक महत्व से जुड़ा मंदार पर्वत इन दिनों अपनी बदहाल स्वच्छता व्यवस्था को लेकर चर्चा में है. समुद्र मंथन की पौराणिक कथा से जुड़ा यह पर्वत, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक आभा के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है, आज जगह-जगह फैली गंदगी के कारण बदरंग नजर आने लगा है.

आस्था और पर्यटन स्थल पर गंदगी का अंबार

मंदार पर्वत पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक भ्रमण के लिए पहुंचते हैं, लेकिन उनके द्वारा उपयोग किये गये खाद्य पदार्थों के प्लास्टिक रैपर, पानी की बोतलें, कागज और अन्य कचरे को खुले में ही छोड़ दिया जा रहा है. स्थिति यह है कि पर्वत के कई हिस्सों में कचरे के ढेर लगे हुए हैं, जिससे न केवल प्राकृतिक सौंदर्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंच रहा है.

स्थानीय दुकानदारों की भी लापरवाही

पर्वत के आसपास लगे अस्थायी और स्थायी दुकानों से निकलने वाला कचरा भी समुचित तरीके से निस्तारित नहीं किया जा रहा, जिससे समस्या और विकराल हो रही है. पूरे पर्वत पर अस्थाई दुकानदारों के द्वारा खाद्य पदार्थों के साथ-साथ पेय सामग्री की बिक्री की जाती है. इसके बाद सैलानियों के द्वारा फेंके गये खाद्य पदार्थों के रैपर को दुकानदारों के द्वारा साफ नहीं किया जाता. यह भी गंदगी का बड़ा कारण है.

सफाई कर्मियों की मौजूदगी, फिर भी हालात बेहाल

मंदार पर्वत परिसर में सुलभ इंटरनेशनल के सफाई कर्मियों के साथ-साथ नगर पंचायत की टीम भी तैनात है. बावजूद इसके, साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं है. नियमित मॉनिटरिंग और ठोस कार्य योजना के अभाव में सफाई अभियान प्रभावी साबित नहीं हो पा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि सफाई कर्मियों की संख्या, संसाधनों की कमी और निगरानी की ढिलाई के कारण यह स्थिति उत्पन्न हो रही है.

प्रशासनिक उदासीनता पर उठ रहे सवाल

नगर प्रशासन और जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. पर्यटन और धार्मिक महत्व को देखते हुए यहां विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाना चाहिए, लेकिन अब तक कोई ठोस और दीर्घकालिक योजना धरातल पर नजर नहीं आ रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते कारगर उपाय नहीं किये गये तो मंदार पर्वत की छवि को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है.

जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों की चुप्पी भी चिंता का विषय

क्षेत्र में सक्रिय कथित समाजसेवियों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों की ओर से भी इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है. जागरूकता अभियान, स्वच्छता रैली या जनसहभागिता कार्यक्रमों की कमी स्पष्ट रूप से महसूस की जा रही है. अगर जनप्रतिनिधि और समाजसेवी इस दिशा में पहल करें तो मंदार पहले से बेहतर दिखने लगेगा.

क्या हो सकते हैं समाधान?

पर्वत क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में डस्टबिन की व्यवस्था, प्लास्टिक उपयोग पर सख्त प्रतिबंध और जुर्माना, नियमित मॉनिटरिंग और सफाई व्यवस्था की जवाबदेही तय करना, पर्यटकों और दुकानदारों के लिए जागरूकता अभियान, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय युवाओं को स्वच्छता अभियान से जोड़ना, मंदार पर्वत केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और संस्कृति का प्रतीक है. इसकी स्वच्छता और गरिमा बनाये रखना प्रशासन और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है.

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel