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Home बिहार बांका चांदन नदी के प्रतिबंधित घाटों से बदस्तूर जारी है बालू खनन, दो मौतों के बाद भी प्रशासन मौन

चांदन नदी के प्रतिबंधित घाटों से बदस्तूर जारी है बालू खनन, दो मौतों के बाद भी प्रशासन मौन

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चांदन नदी के प्रतिबंधित घाटों से बदस्तूर जारी है बालू खनन, दो मौतों के बाद भी प्रशासन मौन

बांका. जिले में अवैध रूप से बालू उठाव पर रोक लगाने के लिए प्रशासन कटिबद्ध है. लगातार छापेमारी भी जारी है. बावजूद अमरपुर प्रखंड में अवैध रूप से बालू उठाव धड़ल्ले से हो रहा है. प्रशासनिक दावा यहां खोखले साबित हो रही है. जानकारी के अनुसार, अमरपुर प्रखंड अंतर्गत चांदन नदी के प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध बालू खनन का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है. जेठौर घोघा बीयर से लेकर बीरमां घाट तक लगभग सात किलोमीटर का इलाका बालू तस्करों के लिए हॉटस्पॉट बना हुआ है. शासन प्रशासन तमाम कोशिशों के बावजूद बालू तस्कर पूरी तरह बेलगाम हैं. यहां के चोकर, मालदेवचक, तेतरिया, किशनपुर, कुम्हरा घाट, तारडीह, लौसा, खंजरपुर, राजापुर, बीरमां, वासुदेवपुर समेत दर्जन भर प्रतिबंधित घाटों से बड़े पैमाने पर अवैध खनन और परिवहन जारी है.

ग्रामीण सूत्रों की माने तो शाम ढलते ही इन घाटों पर ट्रैक्टरों की आवाज गूंजने लगती है, जो पूरी रात जारी रहती है. इससे नदी किनारे बसे गांवों के लोग पूरी रात शोर से परेशान रहते हैं. नाम नहीं छापने की शर्त पर ग्रामीणों का कहना है कि बालू तस्करों की ऊंची पहुंच और दबंगई के कारण हमलोग विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं. प्रतिबंधित घाटों से प्रतिदिन 200 से अधिक ट्रैक्टर व पिकअप वाहनों के जरिए अवैध रूप से बालू का उठाव किया जा रहा है. स्थानीय प्रशासन को इस पूरे खेल की जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है. इससे इतर इस मामले को इस तरह भी समझा जा सकता है कि करीब एक माह पूर्व बीरमां बालू घाट पर सजौर थाना क्षेत्र के लखानीपोखर गांव निवासी एक ट्रैक्टर चालक की ट्रैक्टर से दबकर मौत हो गयी थी. वहीं, एक सप्ताह पूर्व लौसा घाट पर डाटबाटी गांव के एक ट्रैक्टर चालक की नदी में ट्रैक्टर पलटने से मौत हो गयी. यह मौतें स्वयं अवैध बालू उठाव की कहानी बयां करती है. बावजूद इसके स्थानीय पुलिस और प्रशासन की ओर से सख्त कदम नहीं उठाए गए. इन घटनाओं के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से क्षेत्र के लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठना लाजिमी है.

किसानों की किसानी हो रही है चौपट

चांदन नदी किनारे से अनवरत अवैध बालू का उठाव होने से किसानों के किसानी चौपट हो रही है. किसानों की माने तो चांदन नदी से पहले पानी सीधे उनके खेतों तक पहुंच जाती थी. अब नदी से लगातार अवैध रूप से बालू उठाव होने से नदी सात-आठ फीट गहरी हो गयी है. जिसके कारण अब खेतों तक नदी का पानी नहीं पहुंच पाती है, जिससे खेती कार्य प्रभावित हो रहा है. खास यह भी कि इन क्षेत्रों से खरीफ व रब्बी फसल उगाने के लिए किसानों को मोटर व पंपसेट का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे खेती दूभर होती जा रही है. खर्चीला खेती होने के कारण किसान लाचार व परेशान है. उधर पूरे मामले में खनन विभाग का मानना है कि अवैध बालू खनन को रोकने के लिए लगातार प्रयास जारी है. जिला खनिज विकास पदाधिकारी बलवंत कुमार ने बताया है कि प्रतिबंधित घाटों से किसी भी कीमत पर बालू उठाव नहीं होने दिया जाएगा. विभाग के द्वारा इस धंधे से जुड़े लोगों की पहचान की जा रही है.

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