बांका में शुरू हुई बिहार की पहली लाह आधारित वाड़ी परियोजना, बदलेगी आदिवासी किसानों की तकदीर

Lac Farming Project Bihar: बांका के 500 आदिवासी परिवारों के लिए बड़ी पहल, नाबार्ड समर्थित लाह आधारित वाड़ी परियोजना से बढ़ेगी आय और रोजगार के अवसर.

By AMIT KR SINHA | June 30, 2026 10:45 AM
मुख्य बातें

कटोरिया (बांका) से दीपक चौधरी की रिपोर्ट

Lac Farming Project Bihar: बांका जिले के आदिवासी किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. नाबार्ड के वित्तीय सहयोग और मुक्ति निकेतन के संचालन में चांदन प्रखंड के डुमरिया गांव से बिहार की पहली पांच वर्षीय समग्र लाह आधारित वाड़ी परियोजना की शुरुआत की गई. इस परियोजना से चांदन और फुल्लीडुमर प्रखंड के 500 आदिवासी परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा.

पौधारोपण के साथ हुआ परियोजना का शुभारंभ

परियोजना का उद्घाटन नाबार्ड के बिहार क्षेत्रीय कार्यालय के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह ने पौधारोपण कर किया. इस अवसर पर स्थानीय ग्रामीणों ने पारंपरिक आदिवासी गीत और नृत्य के साथ अतिथियों का स्वागत किया. वहीं प्रतिभा भास्कर विद्यालय के विद्यार्थियों ने कृषि और ग्रामीण जीवन पर आधारित लोकगीतों की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंग दिया.

बिहार की पहली पांच वर्षीय लाह आधारित वाड़ी परियोजना

मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह ने कहा कि यह बिहार की अपनी तरह की पहली पांच वर्षीय समग्र लाह आधारित वाड़ी परियोजना है. इसका उद्देश्य वैज्ञानिक तरीके से लाह उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के जरिए किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि करना है. उन्होंने कहा कि नाबार्ड आदिवासी समुदाय के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए लगातार काम कर रहा है.

Lac Farming Project Bihar: प्रति एकड़ ढाई लाख रुपये तक आय का लक्ष्य

परियोजना के सफल संचालन से किसानों की आय प्रति एकड़ दो से ढाई लाख रुपये प्रतिवर्ष तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. किसानों को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों के जरिए लाह उत्पादन के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा. कार्यक्रम के दौरान लाभार्थियों के बीच परियोजना से जुड़ी आवश्यक सामग्रियों का भी वितरण किया गया.

ये भी पढ़े : बांका में सड़क व फुटपाथ पर कब्जा करनेवाले सावधान! शहर में जल्द चलेगा अतिक्रमण हटाओ अभियान

चांदन और फुल्लीडुमर के 500 परिवार होंगे लाभान्वित

कार्यक्रम में उपस्थित किसान.

इस परियोजना के तहत चांदन और फुल्लीडुमर प्रखंड के 500 आदिवासी परिवारों को शामिल किया गया है. इनमें से 450 परिवारों को एक-एक एकड़ भूमि पर सेमियालाटा और कुसुम के पौधों के माध्यम से वैज्ञानिक तरीके से लाह उत्पादन के लिए तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहायता दी जाएगी. इसके साथ ही आम और कैलिएंड्रा के पौधों का रोपण कर फल उत्पादन और पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराने की भी योजना है.

लाह उत्पादन के साथ ग्रामीण आजीविका को मिलेगा बल

यह परियोजना केवल लाह उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी. इसके तहत जल और मृदा संरक्षण, जल संसाधन विकास, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य जागरूकता, लाह प्रसंस्करण केंद्र की स्थापना, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) का गठन और सब्जी आधारित अंतरवर्ती खेती को भी बढ़ावा दिया जाएगा. भूमिहीन परिवारों को बकरी पालन जैसी आयवर्धक गतिविधियों से जोड़ने की योजना भी बनाई गई है.

ये भी पढ़े : बांका में आज मौसम का मिजाज बदलने के आसार, गरज-चमक और बारिश का अलर्ट जारी

वित्तीय साक्षरता और साइबर सुरक्षा पर भी जोर

नाबार्ड के सहयोग से भागलपुर जिला केंद्रीय सहकारी बैंक द्वारा वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. नुक्कड़ नाटक के माध्यम से किसानों को ई-केसीसी, जॉइंट लाइबिलिटी ग्रुप, बैंकिंग सेवाओं और डिजिटल भुगतान के बारे में जानकारी दी गई. साथ ही साइबर फ्रॉड, फर्जी कॉल और ओटीपी धोखाधड़ी से बचाव के उपाय भी बताए गए.

कई अधिकारी और किसान रहे मौजूद

कार्यक्रम में नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक अभिषेक आलोक, अधिकारी परमेश कुमार, मुक्ति निकेतन के सचिव चिरंजीव सिंह सहित कई अधिकारी और 100 से अधिक महिला एवं पुरुष किसान उपस्थित रहे. कार्यक्रम का संचालन सौरभ अश्क ने किया.

ग्रामीण उद्यमों का भी किया गया अवलोकन

बांका दौरे के दौरान गौतम कुमार सिंह ने मंदार एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन और थ्रेड्स ऑफ बांका जैसे ग्रामीण उद्यमों का भी अवलोकन किया. उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर रहे हैं.

ये भी पढ़े : कटोरिया के राधानगर उपद्रव पर सख्त हुई पुलिस, आगजनी और तोड़फोड़ करने वालों पर दर्ज होगी प्राथमिकी