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Home बिहार बांका सावन में मिलती हैं सुविधाएं, बाकी 11 महीने संघर्ष करते हैं कांवरिये

सावन में मिलती हैं सुविधाएं, बाकी 11 महीने संघर्ष करते हैं कांवरिये

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सावन में मिलती हैं सुविधाएं, बाकी 11 महीने संघर्ष करते हैं कांवरिये

कटोरिया (बांका) से दीपक चौधरी की रिपोर्ट

Banka News : बांका जिले के कटोरिया क्षेत्र से गुजरने वाले विश्व प्रसिद्ध सुल्तानगंज-बाबाधाम कांवरिया मार्ग पर सालभर शिवभक्तों की आवाजाही बनी रहती है. श्रद्धालु लगभग 100 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग पर जलार्पण करने पहुंचते हैं. हालांकि श्रावणी मेला के दौरान प्रशासन की ओर से व्यापक इंतजाम किए जाते हैं, लेकिन बाकी महीनों में कांवरियों को पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशानी झेलनी पड़ती है.

सिर्फ सावन तक सीमित रह जाती हैं सुविधाएं

श्रावणी मेला के दौरान सुल्तानगंज से झारखंड सीमा तक कांवरियों के लिए ठहराव, पेयजल, चिकित्सा, शौचालय, स्नानागार, बिजली और सुरक्षा जैसी व्यवस्थाएं की जाती हैं. लेकिन मेला समाप्त होते ही अधिकांश सुविधाएं बंद हो जाती हैं, जबकि श्रद्धालुओं की यात्रा पूरे वर्ष जारी रहती है.

हर महीने पहुंचते हैं हजारों शिवभक्त

कांवरिया मार्ग पर केवल सावन में ही नहीं, बल्कि प्रत्येक सोमवार और हर महीने बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगाजल लेकर बाबा धाम पहुंचते हैं. इनमें सामान्य कांवरिये के साथ-साथ डाक बम भी शामिल होते हैं. श्रद्धालुओं का कहना है कि उनकी आस्था सालभर रहती है, इसलिए सुविधाएं भी सालभर उपलब्ध होनी चाहिए.

पेयजल, शौचालय और स्वास्थ्य सुविधा की मांग

मुजफ्फरपुर निवासी शिवभक्त भाग्य नारायण दूबे, जो नियमित रूप से कांवर यात्रा करते हैं, कहते हैं कि सावन के अलावा अन्य महीनों में भी कांवरिया पथ पर पेयजल, शौचालय, स्नानागार, स्वास्थ्य केंद्र, बिजली और सुरक्षा की व्यवस्था बहाल रहनी चाहिए. इससे दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी.

कच्ची कांवरिया पथ पर वाहनों से बढ़ रही परेशानी

समस्तीपुर निवासी कांवरिया अमित कुमार राय उर्फ अमिताभ का कहना है कि सरकार हर वर्ष लाखों रुपये खर्च कर कच्ची कांवरिया पथ पर महीन बालू बिछाती है ताकि श्रद्धालुओं को पैदल चलने में सुविधा हो. लेकिन मेला समाप्त होने के बाद इस मार्ग पर दुपहिया और चार पहिया वाहनों का परिचालन शुरू हो जाता है, जिससे पथ की स्थिति खराब हो जाती है.

सालभर पैदल चलने वाले कांवरियों को होती है दिक्कत

श्रद्धालुओं का कहना है कि वाहनों की आवाजाही से कच्ची पथ कई जगह उबड़-खाबड़ और दुर्गम हो जाती है. ऐसे में सालभर यात्रा करने वाले कांवरियों को काफी कठिनाई झेलनी पड़ती है. उनका मानना है कि कांवरिया पथ की मूल पहचान और उपयोगिता बनाए रखने के लिए इस पर वाहनों की आवाजाही नियंत्रित की जानी चाहिए.

श्रद्धालुओं ने सरकार से की स्थायी व्यवस्था की मांग

शिवभक्तों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि कांवरिया मार्ग पर सिर्फ श्रावणी मेला तक सीमित व्यवस्था के बजाय स्थायी सुविधाएं विकसित की जाएं. उनका कहना है कि यदि सालभर पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य सुविधा, सुरक्षा और स्वच्छता की व्यवस्था बनी रहे तो लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा अधिक सुरक्षित, सुगम और श्रद्धापूर्ण हो सकेगी.

आस्था के साथ सुविधाओं की भी है जरूरत

सुल्तानगंज से बाबाधाम तक की यात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है. ऐसे में श्रद्धालुओं का मानना है कि जब यात्रा पूरे वर्ष जारी रहती है तो सुविधाएं भी पूरे वर्ष उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि शिवभक्त बिना किसी परेशानी के अपनी संकल्प यात्रा पूरी कर सकें.

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