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Home बिहार बांका 10 साल में रेलवे की कमाई बढ़ी, लेकिन अब भी सुविधाओं के लिए तरस रहा कटोरिया स्टेशन

10 साल में रेलवे की कमाई बढ़ी, लेकिन अब भी सुविधाओं के लिए तरस रहा कटोरिया स्टेशन

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10 साल में रेलवे की कमाई बढ़ी, लेकिन अब भी सुविधाओं के लिए तरस रहा कटोरिया स्टेशन
कटोरिया स्टेशन पर नल से पानी नहीं निकलने पर निराश यात्री.

कटोरिया (बांका) से दीपक चौधरी की रिपोर्ट

Deoghar Banka Rail Line: देवघर-बांका भाया कटोरिया रेलखंड पर रेल परिचालन शुरू हुए दस वर्ष पूरे हो गए हैं. 22 जून 2016 को बांका-अंडाल पैसेंजर ट्रेन के संचालन के साथ शुरू हुई इस रेल सेवा ने क्षेत्र के हजारों लोगों को रेल नेटवर्क से जोड़ा और आवागमन को नई दिशा दी. बीते एक दशक में इस रेलखंड ने न केवल यात्रियों की आवाजाही आसान की, बल्कि रेलवे को भी लाखों रुपये का नियमित राजस्व उपलब्ध कराया. इसके बावजूद कटोरिया, चांदन और करझौंसा जैसे स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी आज भी यात्रियों की बड़ी परेशानी बनी हुई है.

लाखों की कमाई, सुविधाओं पर सवाल

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स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे को इस रेलखंड से लगातार आय प्राप्त हो रही है, लेकिन यात्री सुविधाओं के विस्तार की गति बेहद धीमी है. हाल ही में आसनसोल मंडल के डीआरएम ने रेलखंड का निरीक्षण कर सुरक्षा और सुविधाओं की समीक्षा की थी, लेकिन यात्रियों को अब भी जमीनी स्तर पर बदलाव का इंतजार है.

रेलवे सूत्रों के अनुसार कटोरिया, चांदन और करझौंसा स्टेशनों से हर महीने करीब साढ़े आठ लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है. इसमें अकेले कटोरिया स्टेशन की हिस्सेदारी लगभग चार लाख रुपये है. बढ़ती यात्री संख्या इस रेलखंड के महत्व को और मजबूत करती है.

Deoghar Banka Rail Line: सीमित ट्रेनों के भरोसे सफर

वर्तमान में इस रेलखंड पर बांका-अंडाल पैसेंजर, जमालपुर-गोड्डा पैसेंजर, जसीडीह-बांका पैसेंजर और साप्ताहिक अगरतल्ला-देवघर एक्सप्रेस का परिचालन हो रहा है. हालांकि यात्रियों की मांग है कि सहरसा-देवघर एक्सप्रेस स्पेशल का ठहराव भी कटोरिया स्टेशन पर दिया जाए, जिससे कोसी और सीमांचल क्षेत्र के यात्रियों को बड़ी राहत मिल सके.

हावड़ा और पटना के लिए सीधी ट्रेन की मांग

कटोरिया और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग रोजगार, शिक्षा और व्यवसाय के लिए हावड़ा और पटना की यात्रा करते हैं. सीधी रेल सेवा नहीं होने के कारण यात्रियों को पहले बांका या जसीडीह जाना पड़ताहै. स्थानीय लोग चाहते हैं कि देवघर-हावड़ा ट्रेन को बांका तक विस्तारित किया जाए. साथ ही बांका-राजेंद्रनगर एक्सप्रेस को कटोरिया से संचालित करने की मांग भी वर्षों से उठ रही है.

आरक्षण काउंटर नहीं, यात्रियों को अतिरिक्त परेशानी

रेल परिचालन शुरू होने के दस वर्ष बाद भी कटोरिया स्टेशन पर पूर्णकालिक पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (पीआरएस) उपलब्ध नहीं है. आरक्षित टिकट बनवाने के लिए लोगों को देवघर या जसीडीह जाना पड़ताहै. पूछताछ केंद्र नहीं होने से बाहरी यात्रियों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ताहै.

पेयजल, वेटिंग रूम और शौचालय का अभाव

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कटोरिया स्टेशन पर सबसे बड़ी समस्या बुनियादी सुविधाओं की कमी है. यात्रियों के लिए पर्याप्त पेयजल व्यवस्था नहीं है. वेटिंग रूम के अभाव में महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को प्लेटफॉर्म पर ही घंटों इंतजार करना पड़ताहै. शौचालय और पेशाबघर की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है, जिससे यात्रियों को काफी असुविधा होती है.

आरपीएफ भवन तैयार, लेकिन यात्री अब भी वेटिंग रूम से वंचित

यात्रियों की सुरक्षा के लिए स्टेशन पर आरपीएफ ओपी की स्थापना की गई है. फिलहाल इसका संचालन यात्रियों के लिए बनाए गए वेटिंग रूम से हो रहा है. आरपीएफ का नया भवन बनकर तैयार है, लेकिन अब तक कार्यालय वहां स्थानांतरित नहीं किया गया है. इसके कारण यात्रियों को वेटिंग रूम की सुविधा नहीं मिल पा रही है.

नयी रेललाइन परियोजना से जगी उम्मीद

सुल्तानगंज-बांका-देवघर नई रेललाइन परियोजना को लेकर क्षेत्र में नई उम्मीदें जगीहैं. जानकारी के अनुसार एयर और लैंड सर्वे का कार्य अंतिम चरण में है. यह परियोजना पूरी होने पर बाबाधाम आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सीधा लाभ मिलेगा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी.

दस साल बाद भी अधूरी हैं कई अपेक्षाएं

देवघर-बांका रेलखंड ने क्षेत्र की कनेक्टिविटी को नई पहचान दी है और रेलवे की आय में उल्लेखनीय योगदान दिया है. लेकिन यात्री सुविधाओं के विकास की रफ्तार अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही. अब दस वर्ष पूरे होने के बाद लोगों की नजर रेलवे प्रशासन पर टिकी है कि कब पेयजल, शौचालय, वेटिंग रूम, आरक्षण काउंटर और नई ट्रेनों जैसी लंबित मांगों को पूरा किया जाएगा.

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