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Home बिहार बांका नम आंखों से मुल्क की खुशहाली और अमन-चैन के लिए मांगी दुआ

नम आंखों से मुल्क की खुशहाली और अमन-चैन के लिए मांगी दुआ

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नम आंखों से मुल्क की खुशहाली और अमन-चैन के लिए मांगी दुआ

धोरैया में तीन दिवसीय दीनी इज्तिमा सामूहिक दुआ के साथ हुआ समापन

धोरैया. प्रखंड क्षेत्र के काठबनगांव बीरबलपुर पंचायत अंतर्गत बीरबलपुर गांव में आयोजित तीन दिवसीय सालाना दीनी इज्तिमा रविवार को सामूहिक दुआ के साथ संपन्न हो गया. इस धार्मिक आयोजन में बिहार और झारखंड समेत विभिन्न राज्यों से लाखों अकीदतमंद शामिल हुए. समापन के अवसर पर नम आंखों से मुल्क की खुशहाली और अमन-चैन के लिए दुआ मांगी गयी. इज्तिमा की शुरुआत शुक्रवार को जुमा की नमाज के साथ हुई थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की. तीन दिनों तक चले इस आयोजन में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए उलेमा और आलिमों ने लोगों को दीन की सच्ची तालीम से रूबरू कराया. मौलाना इंजीनियर शमीम साहब, मौलाना शब्बीर साहब सहित कई धर्मगुरुओं ने अपने संबोधन में इस्लामी शिक्षाओं पर विस्तार से रोशनी डाली.

झूठ, फरेब, नफरत और बुरे कामों से दूर रहने की अपील

उलेमा ने नमाज, रोजा, जकात, ईमान और नेक अमल की अहमियत बताते हुए कहा कि इंसान को सिर्फ दुनियावी जिंदगी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आखिरत की तैयारी भी जरूरी है. उन्होंने समाज से झूठ, फरेब, नफरत और बुरे कामों से दूर रहने की अपील की तथा इंसानियत की खिदमत को सबसे बड़ा फर्ज बताया. इज्तिमा स्थल पर तीनों दिन अनुशासन और भाईचारे का माहौल बना रहा. दूर-दराज से आए लोगों के लिए ठहरने, खाने-पीने, वजू और नमाज की बेहतर व्यवस्था की गयी थी. आयोजन समिति के स्वयंसेवक लगातार व्यवस्थाओं को संभालते नजर आये. कार्यक्रम में युवा, बुजुर्ग और बच्चों सहित हर वर्ग के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. समापन के अवसर पर विशेष सामूहिक दुआ करायी गयी, जिसमें देश में शांति, भाईचारा, खुशहाली और तरक्की की कामना की गयी. हजारों हाथ एक साथ अल्लाह की बारगाह में उठे और पूरा माहौल रूहानी हो उठा. स्थानीय लोगों ने कहा कि इस तरह के इज्तिमा से समाज में धार्मिक जागरूकता बढ़ती है और आपसी मेल-जोल मजबूत होता है. युवाओं में अच्छे संस्कार विकसित होते हैं और समाज को सही दिशा मिलती है. तीन दिवसीय इस आयोजन ने पूरे क्षेत्र में धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल कायम कर दिया. इज्तिमा के समापन के बाद अकीदतमंद अपने-अपने घरों की ओर लौटे, लेकिन साथ में दीन की सीख, भाईचारे का संदेश और बेहतर जीवन जीने की प्रेरणा लेकर गये.

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