कटोरिया (बांका) से दीपक चौधरी की रिपोर्ट
Bhayharan Temple : कटोरिया नगर पंचायत क्षेत्र के मुड़ियारी मोड़ और बुढ़वातरी स्थित प्रसिद्ध दूबे भयहरण मंदिर में सोमवार को आयोजित वार्षिक पूजा महोत्सव में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला. सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. दूर-दराज के गांवों से पहुंचे लोगों ने मंदिर में मत्था टेककर परिवार की खुशहाली, सुख-समृद्धि और विषैले जीव-जंतुओं से रक्षा की कामना की.
Bhayharan Temple: वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई पारंपरिक पूजा
मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दूध और चावल से विशेष प्रसाद तैयार किया गया, जिसे सबसे पहले भगवान को अर्पित किया गया. इसके बाद जनार पूजा की परंपरा का पालन करते हुए ब्राह्मणों को प्रसाद ग्रहण कराया गया और फिर हजारों श्रद्धालुओं के बीच इसका वितरण किया गया.
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दंड-प्रणाम करने वालों की लगी लंबी कतार
पूजा के दौरान मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा. कई श्रद्धालुओं ने अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर दंड-प्रणाम कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की. दंड-प्रणाम करने वाले श्रद्धालुओं की लंबी कतारें पूरे आयोजन का प्रमुख आकर्षण बनी रहीं.
पूरे दिन व्यवस्थाओं में जुटे रहे ग्रामीण और समिति सदस्य
वार्षिक पूजा महोत्सव को सफल बनाने में स्थानीय ग्रामीणों और पूजा समिति के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. प्रसाद वितरण, श्रद्धालुओं की सुविधा और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर युवा और बुजुर्ग पूरे दिन सक्रिय रहे, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ.
नाग देवता के प्रति अटूट आस्था से जुड़ा है मंदिर
स्थानीय लोगों के अनुसार दूबे भयहरण मंदिर में विराजमान नाग देवता अपने भक्तों को विषैले जीव-जंतुओं और सर्पदंश जैसी समस्याओं से रक्षा प्रदान करते हैं. इसी मान्यता के कारण हर वर्ष आयोजित इस वार्षिक पूजा में क्षेत्र ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
हिंदू-मुस्लिम एकता का बना प्रतीक आयोजन
पूजा महोत्सव के दौरान सांप्रदायिक सौहार्द और सामाजिक एकता की अनूठी तस्वीर भी देखने को मिली. बुढ़वातरी मंदिर में आयोजित प्रसाद वितरण कार्यक्रम में हिंदू समुदाय के साथ-साथ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया. यह दृश्य क्षेत्र की गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे का जीवंत उदाहरण बन गया.
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