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Home बिहार बांका नहरों में पानी नहीं, धान की रोपनी पर गहराया संकट, पंपसेट के सहारे खेती को मजबूर किसान

नहरों में पानी नहीं, धान की रोपनी पर गहराया संकट, पंपसेट के सहारे खेती को मजबूर किसान

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नहरों में पानी नहीं, धान की रोपनी पर गहराया संकट, पंपसेट के सहारे खेती को मजबूर किसान
सूखी नहर की तस्वीर.

मुख्य बातें

पंजवारा, बांका से गौरव कश्यप की रिपोर्ट

Banka Agriculture Crisis: बांका जिले के बाराहाट प्रखंड अंतर्गत पंजवारा क्षेत्र में खरीफ सीजन के बीच सिंचाई संकट गहराने लगा है. क्षेत्र से होकर गुजरने वाली सिंचाई नहर में पानी नहीं आने से धान की रोपनी प्रभावित होने लगी है. खेतों की तैयारी और बिचड़ा बचाने के लिए किसान डीजल चालित पंपसेट का सहारा ले रहे हैं, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है.

सूखी नहर ने बढ़ाई किसानों की परेशानी

पंजवारा, लौढ़िया, खुर्द, जबलपुर समेत आसपास के कई गांवों के किसान सिंचाई के लिए इसी नहर पर निर्भर हैं. लेकिन खरीफ सीजन के सबसे महत्वपूर्ण समय में नहर सूखी रहने से किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है. समय पर पानी नहीं मिलने से धान की रोपनी प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है.

Banka Agriculture Crisis: पंपसेट से सिंचाई करने को मजबूर किसान

नहर में पानी नहीं रहने के कारण किसान डीजल चालित पंपसेट से खेतों की सिंचाई कर रहे हैं. इससे खेती की लागत में लगातार इजाफा हो रहा है. किसानों का कहना है कि डीजल, मशीन और मजदूरी का खर्च बढ़ने से खेती करना मुश्किल होता जा रहा है.

छोटे और सीमांत किसानों पर सबसे ज्यादा असर

क्षेत्र के छोटे और सीमांत किसानों की स्थिति सबसे अधिक प्रभावित हुई है. सीमित संसाधनों वाले किसानों के लिए अतिरिक्त सिंचाई खर्च उठाना चुनौती बन गया है. ऐसे में कई किसान समय पर धान की रोपनी को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं.

समय पर पानी नहीं मिला तो प्रभावित होगा उत्पादन

स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि जल्द नहर में पानी नहीं छोड़ा गया तो खेती का पूरा चक्र प्रभावित हो सकता है. इसका सीधा असर धान उत्पादन पर पड़ेगा और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है.

सिंचाई विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

किसानों ने सिंचाई विभाग से अविलंब नहर में पानी छोड़ने की मांग की है. साथ ही कृषि विभाग से क्षेत्र का निरीक्षण कर आवश्यक कदम उठाने की अपील की है. किसानों का कहना है कि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो खरीफ फसल पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है.

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