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Home बिहार औरंगाबाद हाथी पर सवार होकर आयेंगी मां दुर्गा, डोली पर करेंगी प्रस्थान

हाथी पर सवार होकर आयेंगी मां दुर्गा, डोली पर करेंगी प्रस्थान

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हाथी पर सवार होकर आयेंगी मां दुर्गा,  डोली पर करेंगी प्रस्थान

औरंगाबाद/कुटुंबा. सनातन धर्म में नवरात्रि का महत्व सर्वोपरि है. इसमें भी वैदिक व धार्मिक अनुष्ठान के लिए शारदीय व वासंतिक नवरात्र खास होता है. आदिशक्ति जगत जननी जगदंबा व मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की आराधना के लिए किया जाने वाला शारदीय नवरात्र इस वर्ष 22 सितंबर सोमवार को कलश स्थापन के साथ शुरू हो जायेगा. इस महान अनुष्ठान की पूर्णता एक अक्तूबर बुधवार को होगी. इसमें श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत रखकर श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ खुद से करते हैं या फिर आचार्य से कराते हैं. इस दौरान बहुत से भक्त श्री रामचरितमानस का नवाह्न पाठ भी करते है. ज्योतिर्विद डॉ हेरंब कुमार मिश्र ने बताया कि इस वर्ष नवरात्र में देवी माता का आगमन हाथी पर हो रहा है जो शुभ संकेत है. अच्छी बारिश, बेहतर उत्पादन, प्रकृति में संतुलन, व्यापार व कृषि में सफलता की दृष्टि से मां दुर्गा का हाथी पर आना बहुत ही मंगलदायक है. वहीं देवी मां का प्रस्थान डोली पर हो रहा है, वह भी सामान्य शुभफलदायक है. उन्होंने बताया कि चतुर्थी तिथि की वृद्धि हो जाने के कारण नवरात्रि 10 दिनों की हो रही है जो शुभ फलकारक है. नवरात्र में तिथि की वृद्धि होना अच्छा माना जाता है. यह एक दुर्लभ संयोग होता है जिसमें मां दुर्गा की साधना और आराधना करने का सुनहरा अवसर प्राप्त होता है. ऐसी नवरात्र में किये गये व्रत पूजन से यथेष्ट फल की प्राप्ति होती है. जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं. परिवार में सुख शांति समृद्धि आती है. उन्होंने बताया कि 22 सितंबर सोमवार को रात में 1:19 बजे तक प्रतिपदा तिथि है. दिन में 11 बजकर 25 मिनट तक उत्तरा फाल्गुनी व उसके बाद हस्त नक्षत्र एवं पूरे दिन शुक्ल योग है. ऐसे में सुबह से शाम तक कलश स्थापन किया जा सकता है.

प्रातः 7:40 बजे से सायं 5:35 तक कलश स्थापना के विशेष मुहूर्त

ज्योतिर्विद डॉ मिश्र ने बताया कि सोमवार की प्रातः सात बजकर 40 मिनट से पहले, 9:56 बजे से दोपहर 2:18 मिनट तक और शाम में चार बजे से 5:35 बजे तक कलश स्थापन का विशिष्ट मुहूर्त है. इसी दिन से कलश स्थापना और ध्वजारोहण के साथ दुर्गा सप्तशती व श्रीरामचरित मानस नवाह्न पाठ आरंभ हो जायेगा. उन्होंने बताया कि 22 सितंबर को शैलपुत्री दर्शन, 23 को ब्रह्मचारिणी, 24 को चंद्रघंटा, 25 व 26 को चतुर्थी तिथि में वृद्धि के कारण कुष्मांडा, 27 को स्कंदमाता, 28 को कात्यायनी, 29 को कालरात्रि, 30 को महागौरी और एक अक्तूबर को सिद्धिदात्री माता के दर्शन व पूजन होंगे. त्रिदिवसीय देवी पूजन के लिए 28 सितंबर रविवार को विल्वाभिमंत्रण और संध्याकाल में देवी बोधन, आमंत्रण व अधिवासन होगा. 29 सितंबर सोमवार को दिन में 12:26 बजे से पहले सप्तमी तिथि और मूल नक्षत्र के अंतर्गत सरस्वती का आवाहन होगा, पूजा पंडालों में प्रतिमा के पट खुलेंगे. अष्टमी की महानिशा पूजा भी 29 सितंबर को ही होगी.

दो अक्तूबर धूमधाम से मनाया जायेगा दशहरा

ज्योतिर्विद ने बताया कि महाअष्टमी व्रत 30 सितंबर मंगलवार को किया जायेगा. पूजा पंडालों में संधि पूजा 30 सितंबर को दोपहर 1:21 बजे से 2:10 बजे के बीच की जायेगी. महानवमी का व्रत एक अक्तूबर बुधवार को होगा. इस दिन दो बजकर 35 मिनट के पहले श्रीदुर्गा पाठ व श्री मानस पाठ के हवन किये जायेंगे. उसके उपरांत दशमी तिथि में व्रत का पारण किया जायेगा. उन्होंने बताया कि दो अक्तूबर गुरुवार को पूरे देश में धूमधाम से विजयादशमी मनायी जायेगी. इस दिन उदयकालिक श्रवण नक्षत्र से युक्त दशमी में दिन के दो बजकर 56 मिनट के पहले पूजा पंडालों में स्थापित प्रतिमा का विसर्जन किया जायेगा. इसी दिन शमी पूजन और नीलकंठ दर्शन भी किये जायेंगे. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शारदीय नवरात्र में तामसिक भोजन करने से परहेज करना चाहिए. पूजा-पाठ के दौरान सनातन धर्म के विपरीत आचरण करने से अनिष्ट होता है.

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