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Home बिहार औरंगाबाद फुलवरिया में अवैध आरा मिल सील

फुलवरिया में अवैध आरा मिल सील

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फुलवरिया में अवैध आरा मिल सील

कार्रवाई…वन विभाग की छापेमारी में उपकरण व लकड़ी जब्त कुटुंबा. अवैध तरीके से आरा मिल चलाने और जंगल से इमरती लकड़ी काटकर लाने वालों के प्रति वन विभाग काफी सख्त दिख रहा है. विभाग के अधिकारी ऐसे आरा मिल संचालक पर लगातार कार्रवाई करने में जुटे हैं. शनिवार की सुबह वन विभाग के अधिकारी व टंडवा थाने की पुलिस ने संयुक्त रूप से फुलवरिया गांव में छापेमारी कर कार्रवाई की. अधिकारियों की टीम में महाराजगंज वन क्षेत्र के आरओएफ अविनाश कुमार, टंडवा के वनपाल गौतम कुमार, वनरक्षी सूरज कुमार, काला पहाड़ के वनरक्षी महेश कुमार के साथ पुलिस की टीम शामिल थी. इस छापेमारी के क्रम में अधिकारियों ने बिहार के दक्षिणी क्षेत्र झारखंड बॉर्डर एरिया स्थित फुलवरिया गांव में संचालित एक आरा मिल को उखाड़ कर जब्त कर लिया. कार्रवाई करने पहुंची टीम के अधिकारी ने बताया कि डीएफओ रुचि सिंह के निर्देश पर कार्रवाई की गयी है. इस क्रम में जेसीबी से लकड़ी चिराई से संबंधित उपकरणों को उखाड़ लिया गया. अवैध लकड़ियों को भी जब्त कर तत्काल प्रभाव से आरा मिल को सील कर दिया गया. डीएफओ ने बताया कि गुप्त रूप से सूचना मिली थी कि गांव में कन्हाई शर्मा अवैध आरा मिल का संचालन कर रहे हैं. सटीक सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई की गयी है. हालांकि, टीम पर नजर पड़ने के साथ मिल मालिक और उनके मिस्त्री फरार हो गये. विभाग के अधिकारी ने बताया कि माफियाओं की ओर से कई आरा मिल अवैध रूप से संचालित करने की सूचना मिल रही है. सूचना के सत्यापन के लिए छापेमारी कर इन्हें चिह्नित कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की गयी. हालांकि, वन विभाग की टीम और पुलिस वाहन 112 पर नजर पड़ते के साथ ही मिल मालिक और उनके अन्य कर्मी फरार हो गये. इस मामले में आरा मिल मालिक के विरुद्ध बिहार कास्ट चिरान विनिमय अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गयी है. वन विभाग की कार्रवाई से आरा मशीन संचालकों में हड़कंप है. अवैध आरा मिल संचालकों के उत्पात से उजड़ रहे बाग-बगीचे अवैध आरा मिल संचालकों व लकड़ी कारोबारियों के उत्पात से धरती से पेड़-पौधे समाप्त होते जा रहे हैं. वे बगैर वन विभाग से परमिशन लिए धड़ल्ले से बाग-बगीचे की कटाई कर रहे हैं. स्थानीय स्तर पर हरे-भरे वृक्षों की कटाई होने से जंगल समाप्त होता चला जा रहा है. इससे आम जन जीवन संकट के दौर से गुजर रहा है. धरती की हरियाली समाप्त हो रही है. ऐसे में प्रकृति की निगाहें बेरुखी होती चली जा रही हैं. मॉनसून का कोई ठौर-ठिकाना नहीं रह गया है. जलवायु परिवर्तन में अनिश्चिता आ गयी है. आर्द्रा नक्षत्र में लू तपिश से लोग बेहाल हैं. यहां तक कि लकड़ी माफिया वायुमंडल में भरपूर ऑक्सीजन प्रदान करने वाले आम, बरगद व पीपल आदि वृक्षों को विहीन करने में लगे हैं. सरकारी राजस्व की क्षति जानकारी के अनुसार, झारखंड के बॉर्डर एरिया बिहार पोरसन में संडा से लेकर टंडवा और बेला गजना तक दर्जनों अवैध आरा मिल का संचालन किया जा रहा था. इसकी जानकारी विभाग को नहीं थी. इधर, प्रशासन को पता चला है कि पलामू जिले के धंधेबाज जंगली इलाकों से मंहगी लकड़ियों की चोरी कर लाते हैं. आरा मिल संचालक उनसे औने-पौने दामों में लकड़ी खरीदते हैं और चिराई कर फर्नीचर बनाते हैं. विदित हो कि अवैध आरा मिल संचालन होने से सरकार को लाखों रुपये राजस्व का नुकसान हुआ है.

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