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तीन पनबिजली परियोजनाओं का निर्माण नहीं हो सका पूरा

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तीन पनबिजली परियोजनाओं का निर्माण नहीं हो सका पूरा

दाउदनगर. काराकाट लोकसभा क्षेत्र के चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तो तेज है, लेकिन इस सरगर्मी के बीच अधूरे पड़े पनबिजली परियोजनाओं को पूरा कराने की दिशा में कोई चर्चा तक नहीं सुनी जा रही है. औरंगाबाद जिले के ओबरा प्रखंड में डिहरा व तेजपुरा में क्रमश: 500 गुणा 2 यूनिट व 750 गुणा 2 यूनिट का तथा सिपहा में 500 गुणा 2 यूनिट का पनबिजली परियोजना का निर्माण पटना मेन कैनाल नहर पर होना था. 12 जनवरी 2002 को बिहार सरकार के तत्कालीन ऊर्जा मंत्री द्वारा इन पनबिजली परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया था. सूत्रों से पता चला कि इन तीनों परियोजनाओं पर लगभग 40 करोड़ रुपये खर्च होने है. अधिकांश राशि खर्च भी हो गये, फिर भी इन तीनों परियोजनाओं से एक यूनिट बिजली का उत्पादन भी शुरू नहीं हो पाया. 12 जनवरी 2002 को सिपहा में निर्माण शुरू हुआ था. वर्ष 2013 में इसे पूर्ण हो जाना था, लेकिन अचानक 2012 में काम बंद हो गया. नवंबर 2020 में फिर से काम शुरू हुआ, लेकिन अब तक पूरा नहीं हो सका है. तेजपुरा में लगभग 99 फीसदी काम पूरा हो चुका है, लेकिन बिजली उत्पादन शुरू नहीं हो सका. डिहरा के बारे में सूत्रों से पता चला कि भूमि अधिग्रहण का काम ही अभी फाइनल नहीं हुआ है. बीएचपीसी करा रही कार्य सूत्रों से पता चला कि पनबिजली परियोजना का कार्य बिहार स्टेट हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन करा रही है. इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और सिविल कार्य में इसे विभाजित किया गया है. सिपहां जल विद्युत परियोजना के बारे में संबंधित विभाग के सूत्रों से पता चला कि सिविल का कार्य पूरा हो गया है. इलेक्ट्रिकल का कॉन्ट्रेक्ट हो गया है और जल्द ही काम लगने की संभावना है. तेजपुरा में निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है. डिहरा में कुछ अतिक्रमण संबंधित समस्या के कारण कार्य लंबित है. विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ी परियोजना लोगों का कहना है कि लंबित जल विद्युत परियोजना कार्य दो दशक बाद भी पूरा नहीं हो पाना विभागीय लापरवाही ही कही जा सकती है. कहीं न कहीं मॉनिटरिंग का अभाव रहा. विभागीय स्तर पर सुस्ती बरती गयी, जिसके कारण न तो परियोजना का कार्य पूरा हो सका और न ही नहर के पानी से बिजली का उत्पादन शुरू हो सका.

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