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सदर अस्पताल में नियम के अनुसार नहीं बन रहा जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र

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सदर अस्पताल में नियम के अनुसार नहीं बन रहा जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र

24 घंटे में प्रमाण पत्र निर्गत करने का आदेश कागज़ों तक सीमित

औरंगाबाद ग्रामीण. सरकार भले ही जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र को 24 घंटे के भीतर जारी करने की व्यवस्था को लागू करने की बात कह रही हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है. जिले में प्रमाण पत्र निर्गत करने की प्रक्रिया इतनी जटिल हो गयी है कि आम लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है. जिला सांख्यिकी विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि सभी सरकारी अस्पताल, आंगनबाड़ी केंद्र, नगर परिषद और प्रखंड कार्यालयों को जन्म या मृत्यु की सूचना मिलने के 24 घंटे के भीतर प्रमाण पत्र जारी करना अनिवार्य है. साथ ही नागरिकों को भी निर्देश है कि वे संबंधित काउंटर पर आवश्यक दस्तावेज़ प्रस्तुत करें.हालात यह हैं कि कई आंगनबाड़ी सेविकाएं यह कहकर आवेदन लेने से इनकार कर रही हैं कि उनके पास कंप्यूटर नहीं है और न ही उन्हें विभाग की ओर से कोई निर्देश मिला है. वहीं जब लोग प्रखंड कार्यालय जाते हैं और बताते हैं कि जन्म घर पर हुआ है, तो उनसे आंगनबाड़ी सेविका की रिपोर्ट मांगी जाती है. रिपोर्ट नहीं देने पर उन्हें सरकारी अस्पताल भेज दिया जाता है.

सदर अस्पताल में मनमानी वसूली, सेवा शुल्क के नाम पर लूट

सदर अस्पताल में स्थिति और भी गंभीर है. यहां जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर लोगों से सेवा शुल्क के तौर पर हजारों रुपये वसूले जा रहे हैं. इतना ही नहीं, डिस्चार्ज पेपर के नाम पर भी अतिरिक्त पैसे मांगे जा रहे हैं. पूर्व में दो कार्यपालक सहायकों पर कई जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र फर्जी रूप से पैसे लेकर निर्गत करने के आरोप लगे थे. शिकायत पर जांच के आदेश स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव तक से आये थे. इसके बाद सिविल सर्जन ने सदर अस्पताल के उपाधीक्षक को कार्रवाई के निर्देश दिये थे. जांच के दौरान एक कार्यपालक सहायक प्रशिक्षण के नाम पर वाराणसी स्थित बीएचयू चले गये, बिना सरकारी मोबाइल या चार्ज सौंपे. उनकी जिम्मेदारी डॉ अभिषेक कुमार को सौंपी गयी. इसके बाद एक अन्य कर्मी को प्रतिनियुक्त किया गया, जिसने 72 घंटे में ही आवेदन देकर कार्यभार संभालने से मना कर दिया. कारण यहां गड़बड़ियां इतनी हैं कि काम करना संभव नहीं है. बिना वरीय पदाधिकारी की अनुमति के उपाधीक्षक द्वारा सुशील कुमार को नियुक्त किया गया. उनके द्वारा भी 24 घंटे में कोई प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किया जा रहा है. हालांकि, काउंटर पर एक होर्डिंग लगा है जिसमें आवेदन जमा और प्रमाण पत्र वितरण का समय दर्शाया गया है, लेकिन कितने आवेदन आये और कितने प्रमाण पत्र जारी किये गये, इसका कोई रिकॉर्ड अस्पताल प्रशासन के पास नहीं है. सूत्रों के अनुसार, सुशील कुमार द्वारा हर दिन सेवा शुल्क लेकर प्रमाण पत्र जारी किये जा रहे हैं, लेकिन इनकी कोई सरकारी रसीद नहीं दी जाती. अगर जांच करायी जाये, तो यह बड़ा घोटाला उजागर हो सकता है.

प्रशासनिक निष्क्रियता या मिलीभगत

जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र आम नागरिक के लिए सबसे जरूरी दस्तावेज़ों में शामिल हैं. ऐसे में भ्रष्टाचार और लापरवाही का यह आलम अगर बना रहा, तो न केवल सरकार की योजना विफल होगी, बल्कि आमजन का भरोसा भी सरकारी व्यवस्था से उठ जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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