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औरंगाबाद में 74.1 एमएम बारिश

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औरंगाबाद में 74.1 एमएम बारिश

झमाझम बारिश से किसानों के चेहरे खिले औरंगाबाद/अंबा. जिले के विभिन्न क्षेत्रों में शनिवार की दोपहर से शुरू झमाझम बारिश के साथ मॉनसून का आगमन हो गया है. समाचार प्रेषण तक रूक-रूककर बारिश हो रही थी. बड़ी बात यह है कि मॉनसून की बारिश से खेतिहंरों के मायूस चेहरे खिल उठे हैं. मौसम का पारा भी लुढ़क गया है. तापमान में कमी भी आ गयी है. आसाढ़ की बारिश से बेहाल जीव-जंतुओं को भीषण गर्मी से थोड़ी राहत मिली है. देखने में पूरा वातावरण सुहाना और खुशनुमा प्रतीत हो रहा है. वैसे खरीफ फसलों की खेती शुरू करने के लिए आर्द्रा नक्षत्र की बारिश वरदान साबित होगी. वैसे खरीफ फसल की खेती शुरुआत करने का समय रोहिणी, मृगशिरा और आधा से अधिक आर्द्रा नक्षत्र के साथ-साथ पूरा जून माह सूखा गुजर गया. खेतों में नमी लायक बारिश नहीं हुई थी. प्रकृति की बेरुखी से किसान काफी चिंतित थे. बारिश के इंतजार में किसान आसमान की ओर टकटकी लगाये थे. शुक्रवार यानी 28 जून तक आसमान से अंगारे बरस रहे थे. धरती तप रही थी. प्रायः लोग सुबह आठ बजे के बाद घर से बाहर निकलने में सहम रहे थे. तपिश के दौरान बिजली पंखा, कूलर और वातानुकूलित सिस्टम काम नहीं कर रहा था. वन प्राणी पानी की तलाश में जंगल छोड़कर गांव के ओर भटक रहे थे. आर्द्रा नक्षत्र की बारिश धान के बिचड़ों के लिए रामबाण साबित हुई है. अत्यधिक तपिश से नर्सरी में झुलस रहे बिचड़ों में जान आ गयी है. खरीफ फसल की खेती शुरू होने की जगी उम्मीद मॉनसून की बारिश से धरती में हल्की नमी आ गयी है. अब किसानों में मोटे अनाज व खरीफ फसल की खेती शुरू होने की उम्मीद जगी है. जिले के दक्षिणी क्षेत्र झारखंड के बॉर्डर एरिया में सिंचाई का घोर अभाव है. उक्त क्षेत्र के कृषक पूर्ण रूप से प्रकृति पर आश्रित हैं. इंद्र की मेहरबानी पर ही खेती संभव है. इन क्षेत्रों में खासकर सांवा, मक्का, जिनोरा, मड़ुआ आदि मोटे अनाज के साथ तेलहनी, तील, मूंगफली के अलावे हल्दी, अदरक, सुथनी व अरहर की खेती होती है. वैसे तो अन्य प्रखंड खरीफ सब्जी की खेती के लिए मशहूर है, पर असिंचित क्षेत्रों में व्यापक पैमाने पर सब्जी की खेती की जाती है. रिटायर्ड कृषि पदाधिकारी रामचंद्र सिंह और रिटायर्ड अंचल कर्मी किसान शिवनाथ पांडेय तथा किसान राधेश्याम सिंह बताते हैं कि मौसम अनुकूल रहने पर ही खरीफ की खेती संभव है. ऐसे तो मोटे अनाज की बुआई करने का उपयुक्त समय मृगशिरा व आर्द्रा नक्षत्र माना जाता है. देर से बुआई करने से उपज प्रभावित होती है. इधर, वर्षाभाव में अभी तक जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लक्ष्य के अनुरूप धान का बिचड़ा नहीं गिराया जा सका है. ज्योतिर्विद ने किया था आगाह बारिश के बारे में लोग विद्वान आचार्यों से जानकारी प्राप्त करने का प्रयास कर रहे थे. इसके पहले ज्योतिर्विद डॉ हेरंब कुमार मिश्र ने पञ्चाङ्ग का हवाला देते हुए बताया था कि आर्द्रा नक्षत्र चातक वाहन और स्त्री पुरुष तथा चंद्र सूर्य योग है. एक सप्ताह आर्द्रा नक्षत्र बीतने के बाद 28 व 29 जून से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बारिश की दौर शुरू होगा. उन्होंने बताया था कि आसाढ़ कृष्ण पक्ष 13 दिनों का है, जो देश-दुनिया के लिए शुभ संकेत नहीं है. इस दौरान कहीं हल्की, तो कहीं भारी बारिश हो सकती है. हसपुरा में सबसे अधिक 132.2 एमएम बारिश जिला सांख्यिकी के आकड़ों के अनुसार, 19 से 21 जून के बीच तथा 24 और 25 जून को एक दो प्रखंडों में बूंदा-बूंदी हुई थी. अधिकारियों ने बताया कि 29 से लेकर 30 जून यानी रविवार की सुबह तक हसपुरा प्रखंड में सबसे अधिक 132.2 एमएम तथा अब तक दो दिनों में अनुपात से अधिक 148 एमएम बारिश हुई है. वहीं बारूण प्रखंड में अबतक मात्र 4.4 तथा मदनपुर में 7.8 एमएम सबसे कम बारिश हुई है. इसी तरह सदर प्रखंड में 125.8 एमएम, दाउदनगर प्रखंड में 95.8 एमएम, नवीनगर में 89 एमएम, देव में 87 एमएम, गोह में 77 एमएम, कुटुंबा में 75 एमएम, रफीगंज में 59.4 तथा ओबरा प्रखंड क्षेत्र में 45.4 एमएम बारिश हुई है. एसएसओ ब्रजेंद्र सिंह ने बताया कि 28 जून तक जिले में मात्र 11 एमएम बारिश हुई थी. 29 से लेकर 30 जून तक अलग-अलग प्रखंड में 815 एमएम औसतन बारिश हुई है. जिले में वर्षा का वास्तविक अनुपात 74.1 एमएम दर्ज किया गया है. उन्होंने बताया कि इस माह में 136.1 एमएम बारिश होनी चाहिए थी. क्या बताते हैं मौसम वैज्ञानिक मौसम वैज्ञानिक डॉ अनूप कुमार चौबे ने बताया कि औरंगाबाद समेत बिहार के सभी जिलों में मॉनसून का प्रसार हो गया है. आगामी दिनों में झोंके के साथ 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने और मेघगर्जन के साथ वर्षा होने की संभावना जतायी गयी है. इस बीच आकाशीय बिजली गिरने से इंकार नहीं किया जा सकता है. एक जुलाई तक मॉनसून को और सक्रिय होने की उम्मीद है. पूर्वानुमान के अनुसार मौसम का अधिकतम तापमान 36.5 से लेकर 33.5 डिग्री के बीच रहने की संभावना है. न्यूनतम तापमान में भी दो से लेकर पांच डिग्री तक कमी आयेगी.

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