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Home बिहार औरंगाबाद जिले के 496 बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में दी जायेगी नि:शुल्क शिक्षा

जिले के 496 बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में दी जायेगी नि:शुल्क शिक्षा

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जिले के 496 बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में दी जायेगी नि:शुल्क शिक्षा

अंबा. जिले के 496 बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में नि:शुल्क शिक्षा दी जायेगी. शिक्षा विभाग के ज्ञानदीप पोर्टल पर बच्चों को विद्यालय आवंटित कर दिया गया है. वेबसाइट पर आवंटित विद्यालय में बच्चे 20 जून तक नामांकन ले सकेंगे. विभाग द्वारा सूची जारी किये जाने के उपरांत डीपीओ सुरेंद्र कुमार व डीपीओ गार्गी कुमारी ने निजी विद्यालय संचालकों को इस संबंध में बताया कि स्कूल आवंटन में पूरी तरह पारदर्शीता अपनायी गयी है. जिन बच्चों को प्राइवेट विद्यालय में निशुल्क शिक्षा दी जानी है, उनमें अलाभकारी समूह व कमजोर वर्ग के बच्चे शामिल है. अलाभकारी समूह में अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक समूह के ऐसे बच्चों को रखा गया है, जिनके माता-पिता या अभिभावक का वार्षिक आय एक लाख रुपये तक हो. इसके साथ ही कमजोर वर्ग में सभी जाति वर्ग के बच्चे को शामिल किया गया है, जिनके माता-पिता या अभिभावक का वार्षिक आमदनी दो लाख से कम हो. डीइओ ने विद्यालय संचालक से बताया कि जिन बच्चों का नाम उनके स्कूल के साथ टैग किया गया है, उन्हें विद्यालय में नामांकन लेकर पहली कक्षा निशुल्क शिक्षा दी जानी है. उन्होंने बताया कि ऐसे बच्चों से किसी तरह का शुल्क लिया जाना वर्जित है. इस मौके पर निजी विद्यालय संघ नैप्स के जिलाध्यक्ष अंबेडकर पाल, उपाध्यक्ष अजय शर्मा, सचिव संतोष कुमार, कुटुंबा प्रखंड अध्यक्ष अजय पांडेय आदि मौजूद थे. गौरतलब है कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 एवं बिहार बच्चों को मुफ्त अनिवार्य शिक्षा 2011 के तहत प्रस्वीकृति प्राप्त निजी विद्यालय में 25 प्रतिशत अलाभकारी एवं कमजोर समूह के बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जानी है. ऐसे बच्चों को ज्ञानदीप पोर्टल के माध्यम से ही नामांकन की प्रक्रिया किया जाना है. बच्चों के नामांकन के लिए विद्यालय आवंटन करने में नजदीक के स्कूल को प्राथमिकता दी गयी है. इसके लिए एक जुलाई तक आवेदन दिया गया था. बच्चे एवं अभिभावक ज्ञानदीप पोर्टल के माध्यम से अपना आवेदन किये थे. आवेदन में घर से विद्यालय की दूरी का जिक्र करते हुए नजदीक के पांच विद्यालय को चिन्हित किया जाना था. सरकार के इस प्रक्रिया से कमजोर वर्ग के बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में नामांकन लेने में सहूलियत होगी. उन्हें प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने के लिए अब आर्थिक तंगी नहीं झेलना पड़ेगा.

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