अरवल से निशिकांत की रिपोर्ट
Arwal News : जिले में इन दिनों घोड़परास (नीलगाय) के आतंक से किसान परेशान हैं. झुंड के रूप में खेतों में पहुंच रहे घोड़परास धान के बिचड़े समेत अन्य फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा रहे हैं. जिले के दर्जनों गांवों के किसान लगातार फसल बर्बाद होने से चिंतित हैं. किसानों का कहना है कि कई बार प्रशासन और वन विभाग से शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है.
झुंड में पहुंचकर फसलों को कर रहे तबाह
किसान रविंद्र सिंह, गिरीश कुमार और सत्यप्रकाश ने बताया कि खेतों में लगी धान की नर्सरी (बिचड़े) को घोड़परास प्रतिदिन नुकसान पहुंचा रहे हैं. एक साथ 15 से 30 घोड़परास खेतों में प्रवेश कर फसल चरने के साथ-साथ उसे रौंदकर भी बर्बाद कर देते हैं. किसानों के अनुसार लगातार निगरानी करना संभव नहीं हो पाता, जिसका फायदा घोड़परास उठा रहे हैं.
कई बार शिकायत, फिर भी नहीं मिली राहत
किसानों ने बताया कि घोड़परास के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए जिला प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों को कई बार आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक राहत पहुंचाने की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है. इससे किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार झुंड को भगाया जाता है, लेकिन अगले ही दिन वे फिर खेतों में लौट आते हैं.
भगवान भरोसे खेती करने को मजबूर किसान
किसान बाबूलाल ने बताया कि घोड़परास केवल फसल खाते ही नहीं, बल्कि उसे रौंदकर भी भारी नुकसान पहुंचाते हैं. उन्होंने कहा कि 24 घंटे खेतों की रखवाली संभव नहीं है. ऐसे में किसान भगवान भरोसे खेती करने को मजबूर हैं. किसानों ने सरकार और प्रशासन से इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है.
वन्य प्राणी अधिनियम के कारण नहीं कर सकते कार्रवाई
घोड़परास वन्य जीव की श्रेणी में आते हैं. ऐसे में उन्हें मारने या नुकसान पहुंचाने पर वन्य प्राणी अधिनियम के तहत कार्रवाई का प्रावधान है, जिससे ग्रामीण कोई कठोर कदम उठाने से डरते हैं. वनपाल सुरेंद्र तिवारी ने बताया कि विशेष परिस्थितियों में संबंधित मुखिया की अनुशंसा पर अधिकृत शूटर की व्यवस्था का प्रावधान है. हालांकि किसानों का कहना है कि इस दिशा में त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है.
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