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अरवल में ब्रह्मेश्वर मुखिया के शहादत दिवस पर जुटे समर्थक, कार्यों को किया याद

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अरवल में ब्रह्मेश्वर मुखिया के शहादत दिवस पर जुटे समर्थक, कार्यों को किया याद
ब्रह्मेश्वर मुखिया के शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

Arwal News: (निशिकांत की रिपोर्ट) रामपुर चौराम में भारतीय किसान महासंघ के संरक्षक ब्रह्मेश्वर नाथ (ब्रह्मेश्वर मुखिया) के शहादत दिवस पर एक भव्य श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. इस दौरान भारी संख्या में स्थानीय लोग और विभिन्न संगठनों के नेता एकत्रित हुए. उपस्थित लोगों ने ब्रह्मेश्वर नाथ के चित्र और स्मारक पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और समाज के लिए किए गए उनके कार्यों को याद किया.

ब्रह्मेश्वर मुखिया के कार्यों की सराहना

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने ब्रह्मेश्वर मुखिया के कार्यों की जमकर सराहना की. उपस्थित लोगों ने कहा कि उस दौर में जब तत्कालीन सरकार पूरी तरह पंगु हो चुकी थी, तब उन्होंने आत्मरक्षा हेतु निजी सेना का गठन किया था. वक्ताओं ने कहा कि उस समय नक्सली हर दिन किसानों के खेतों पर लाल झंडा गाड़कर खेती रोक रहे थे और पुलिस थानों पर हमले हो रहे थे. ऐसी स्थिति में सरकार कुछ नहीं कर पा रही थी. तब मुखिया जी ने स्वयं की और किसानों की रक्षा के लिए कदम उठाया, नक्सलियों से लोहा लिया और बिहार को नक्सली प्रभाव से मुक्त कराया.

अपनों की गद्दारी से हुए वीरगति को प्राप्त वक्ता

सभा में मौजूद लोगों ने कहा कि तत्कालीन सरकार ने उन पर झूठे मुकदमे लादकर हत्या के आरोप लगाए थे. लेकिन सच्चाई यही है कि मुखिया जी ने अपने पूरे जीवनकाल में एक चींटी तक को नहीं मारा. यही वजह रही कि चंद वर्ष जेल में बिताने के बाद माननीय न्यायालय ने उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया था. वक्ताओं ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि बाद में कुछ अपने ही लोग गद्दार निकले, जिसके कारण मुखिया जी वीरगति को प्राप्त हुए.

शहादत दिवस पर इन लोगों ने किया माल्यार्पण

ब्रह्मेश्वर नाथ के 14वें शहादत स्मारक पर माल्यार्पण करने वालों में मुख्य रूप से भाजपा नेता दीपक शर्मा, समाजसेवी विक्रम सिंह, पिंटू शर्मा और मंटू शर्मा शामिल थे. इसके साथ ही बिक्रम सिंह, नवनीत पांडे, अविनाश कुमार, राहुल कुमार, दिलीप कुमार, अविनाश, राहुल कुमार, शिवम, अंकित, रणविजय, गोलू, शुभम, पुरुषोत्तम सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और समर्थक उपस्थित रहे.

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मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर पलायन कर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.
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