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Home बिहार आरा गंगा दशहरा पर श्रद्धालुओं ने गंगा नदी में लगायी आस्था की डुबकी, की पूजा-अर्चना

गंगा दशहरा पर श्रद्धालुओं ने गंगा नदी में लगायी आस्था की डुबकी, की पूजा-अर्चना

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गंगा दशहरा पर श्रद्धालुओं ने गंगा नदी में लगायी आस्था की डुबकी, की पूजा-अर्चना

आरा/बड़हरा. गंगा दशहरा पर जिले भर के श्रद्धालुओं ने गंगा नदी के विभिन्न घाटों एवं अन्य नदियों में श्रद्धा की डुबकी लगायी. स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने पूजा की एवं दान पुण्य किया. इसे लेकर गंगा घाटों पर भीड़ उमड़ती रही. ज्येष्ठ मास की चिलचिलाती धूप भी श्रद्धालुओं की श्रद्धा भाव पर असर नहीं डाल सका. हर-हर गंगे की जय घोष से जिले के सभी गंगा घाट गूंज रहे थे.

सुबह से ही उमड़ने लगे थे श्रद्धालु :

गंगा दशहरा को लेकर सुबह से ही गंगा नदी सहित अन्य नदियों की घाटों पर श्रद्धालु उमड़ने लगे थे. सुबह जगकर पूरी तैयारी के साथ श्रद्धालु स्नान करने को लेकर घरों से निकल पड़े. इस दौरान महिलाएं भी झुंड की झुंड गंगा घाटों पर पहुंच रही थीं एवं भगवान को समर्पित गीत गा रही थीं. कोई पैदल ही पहुंच रहा था, तो कोई वाहन से पहुंच रहा था. सभी के मन में श्रद्धा का भाव दिखाई दे रहा था. हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा का पावन पर्व मनाया जाता है. कहा जाता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से 10 तरह के पापों से मुक्ति मिलती है. मोक्ष की प्राप्ति होती है. जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है. ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन हस्त नक्षत्र में मां गंगा स्वर्ग से धरती पर आयी थीं. गंगा दशहरा पर दान और स्नान का अधिक महत्व बताया गया है. इस दिन विष्णुपदी, पुण्यसलिला मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ. गंगाजल के स्पर्श से स्वर्ग की प्राप्ति होती है. ज्येष्ठ शुक्ल की दशमी तिथि को पहाड़ों से उतरकर मां गंगा हरिद्वार ब्रह्मकुंड में आयी थीं. तभी से इस दिन को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाने लगा.

गंगा दशहरा पर बने थे तीन शुभ संयोग :

गंगा दशहरा पर इस साल तीन शुभ संयोग बने थे. गंगा दशहरा पर रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग बना था. इस दिन सूर्योदय के साथ ही रवि योग शुरू हो गया. इस शुभ योग में पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों को करना बहुत ही शुभ माना जाता है.

इन घाटों पर लोगों ने लगायी श्रद्धा की डुबकी :

गंगा नदी के सिन्हा घाट महुली घाट एकौना घाट सोन नदी के कोईलवर, संदेश ,अंधारी, बिहटा, सहार आदि घाटों पर श्रद्धालुओं ने डुबकी लगायी. भीषण गर्मी के बावजूद गंगा दशहरा पर डुबकी लगाने वालों की आस्था भारी : वहीं बड़हरा प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गंगा नदी घाटों पर मां गंगा के अवतरण दिवस गंगा दशहरा पर श्रद्धालु अहले सुबह से ही पहुंचकर आस्था की डुबकी लगाये. महुली, सिन्हा, बलुआ, खवासपुर, केशोपुर, बड़हरा व बिंदगावां संगम (सरयू, सोन व गंगा) तट पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर विधिवत पूजन अर्चन की. भीषण गर्मी के बावजूद आस्था भारी रही. गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने मां काली मंदिर बखोरापुर में पूजा की. स्नान पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने घाट पर जरूरतमंदों में अनाज और वस्त्र का दान किया.

गंगा घाटों पर लगा था मेला : इस दौरान गंगा घाटों पर जलेबी, पटौरा, शंकर मिठाई, बच्चों के खिलौने, महिलाओं के शृंगार की दुकान सिन्हा, महुली व बबुरा में लगी हुई थी. स्नान करने के बाद महिला, पुरुष व बच्चों ने सिंघाड़ा व चाट का स्वाद लेने में कोई परहेज नहीं किया. वहीं नदी घाटों व मंदिरों पर श्रद्धालु राजा सागर और भागीरथ की कथा सुन धन्य हो गये. मनीछापरा गांव निवासी पंडित विजय तिवारी ने बताया कि गंगा दशहरा का पर्व हर साल ज्येष्ठ महीना के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है. शास्त्र के अनुसार इसी दिन गंगा धरती पर हस्त नक्षत्र में अवतरित हुई थीं. इसलिए इस दिन गंगा स्नान काफी फलदायी माना जाता है. स्नान दान पुण्य के कार्यों के लिए भी ये दिन महत्वपूर्ण माना गया है. हिंदू धर्म में गंगा नदी को सबसे पवित्र माना गया है. कहा जाता है कि गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाकर भक्त को दस हजार पापों से मुक्ति मिल जाती है. जिसमें तीन प्रकार के दैहिक, चार प्रकार वाणी, तीन मानसिक पाप गंगा स्नान से धुल जाते हैं.

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