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Home बिहार आरा शरणागति व एकनिष्ठ भाव से भगवान भक्त की रक्षा के लिए दौड़े आते : यतिराज

शरणागति व एकनिष्ठ भाव से भगवान भक्त की रक्षा के लिए दौड़े आते : यतिराज

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शरणागति व एकनिष्ठ भाव से भगवान भक्त की रक्षा के लिए दौड़े आते : यतिराज
सांकेतिक तस्वीर

उदवंतनगर.

भगवान भक्त की सच्ची पुकार पर दौड़े चले आते हैं. उनकी कृपा में उच्च व निम्न का भेद नहीं रहता. पुकार चाहे. गीध की हो, अजामील की हो, द्रौपदी की अथवा प्रहलाद की हो. भक्त की सच्ची पुकार पर भगवान को आना ही पड़ता है.

वैसे में बात जब परम भागवत प्रहलाद की हो तो क्या कहना. उक्त बातें जीरो माइल पर आयोजित श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ सह श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के दौरान श्रीमद्भागवत कथा सुनाते हुए संत सुंदर राज (यतिराज) महाराज जी ने कही. भागवत प्रेमियों को स्वामी जी ने प्रहलाद चरित्र की कथा सुनाते हुए कहा कि प्रहलाद का जन्म राक्षस कुल में हुआ था, जहां विष्णु नाम लेना वर्जित था. दैत्य राज हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को तरह तरह से प्रताड़ित किया. होलिका के माध्यम से आग में जलाकर मारने का प्रयास किया. अंत में खुद प्रहलाद को मारना चाहा. प्रहलाद की पुकार पर भगवान दौड़े आये व नरसिंह रूप में हिरण्यकश्यप का अंत किया तथा भक्त के प्रण की रक्षा किया. गजेंद्र मोक्ष की मार्मिक कथा सुनाते हुए संत शिरोमणि ने कहा कि जब सभी आपका साथ छोड़ देते हैं तब भगवान सहारा बनते है. मनुष्य जब एकीभाव से भगवान को पुकारता है तो वे द्रौपदी की तरह चीर हरण से बचाते हैं व उत्तरा की गर्भस्थ शिशु की तरह आपकी रक्षा करते हैं. ग्राह्य से द्वंद्व युद्ध में हारे गजराज ने नारायण, अखिल गुरु, भगवान नमस्ते त्राहिमाम शरणागतम् कह कर एकीभाव से पुकारा तो नारायण आ गए. ग्राह्य को मारकर गजराज की रक्षा की. शनिवार को उन्होंने राजा पृथु व जड़ भरत की कथा सुनाई. यज्ञ के संयोजक ज्योति नारायणाचार्य ने बताया कि सोमवार को कृष्ण जन्मोत्सव की झांकी निकाली जायेगी. आयोजकों में करुण सिंह, जितेन्द्र राय, वरुण सिंह, संजय सिंह सिपाही, अरविंद सिंह, मुरारी नारायणाचार्य,उमेश राय, डब्ल्यू सिंह,कमेन्दर सिंह, आनंद सिंह, रणजीत सिंह मुख्य थे.

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