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सदर अस्पताल के एक्स-रे व कैंसर जांच केंद्र में ताला

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सदर अस्पताल के एक्स-रे व कैंसर जांच केंद्र में ताला

आरा.

जिले का सदर अस्पताल कुव्यवस्था का सबसे बड़ा संस्थान बनकर रह गया है. मरीजों के प्रति अस्पताल प्रबंधन एवं चिकित्सकों के पास कोई संवेदनशीलता नहीं है. ऐसे में मरीज काफी परेशान रह रहे हैं. उनका इलाज सही ढंग से नहीं हो रहा है. सरकार द्वारा उपलब्ध करायी गयी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. मरीजों का आर्थिक व मानिसक शोषण किया जा रहा है. इसके बावजूद इन पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जा रही है.

नहीं किया जाता है मरीजों का एक्स-रे :

सदर अस्पताल में सरकार ने काफी ताम-झाम के साथ वर्षों पहले मरीजों की सुविधा के लिए एक्स-रे की व्यवस्था उपलब्ध करायी थी, ताकि मरीजों को कम पैसे में एक्स-रे का काम हो सके, लेकिन कर्मियों एवं चिकित्सकों की मनमानी के कारण जब भी मरीज एक्स-रे के लिए पहुंचते हैं, तब टेक्नीशियन द्वारा कहा जाता है कि फिल्म समाप्त हो गया है या फिर मशीन खराब है. इस तरह बहाना बनाकर उन्हें वापस कर दिया जाता है एवं बाहर में खास जगह पर भेजा जाता है. इससे मरीजों को काफी आर्थिक क्षति होती है. जबकि दबंग एवं खास लोगों के पहुंचने पर उनका एक्स-रे कर दिया जाता है.

कैंसर जांच केंद्र पर नहीं होती जांच : जिले के मरीजों को बाहर नहीं जाना पड़े. उन्हें आर्थिक क्षति नहीं उठानी पड़े. कम पैसे में ही सदर अस्पताल में कैंसर की जांच हो सके. इसके लिए एक वर्ष से अधिक समय से कैंसर जांच केंद्र स्थापित किया गया है, पर ऐसा हो नहीं रहा है. केवल कागजों पर ही यह दिखायी देता है. कैंसर जांच केंद्र झुनझुना बनाकर रह गया है. इसे हमेशा बंद रखा जाता है. इसका कोई लाभ मरीजों को नहीं मिल रहा है.

अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल रही मरीजों को :

सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की भी व्यवस्था सरकार ने की है. लगभग दो वर्ष पहले से यह सुविधा उपलब्ध करायी गयी थी. जबकि धरातल पर मरीज को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. चिकित्सकों एवं कर्मियों द्वारा तरह-तरह के बहाने बनाकर उन्हें बाहर में अपने पसंदीदा अल्ट्रासाउंड केंद्र पर भेजा जाता है एवं कमीशन लिया जाता है.

अन्य जांच केंद्रों की भी है यही स्थिति : सदर अस्पताल में सरकार द्वारा उपलब्ध करायी गयी पैथोलॉजी, खून जांच एवं अन्य तरह के जांच केंद्रों की भी यही स्थिति है. जब भोला -भाला एवं गरीब मरीज इन जांच केंद्रों पर जांच के लिए पहुंचता है तो कर्मियों का टका सा जवाब रहता है कि मशीन खराब है या फिर उनसे अधिक पैसा लिया जाता है. वहीं, कई मरीजों को बाहर के विशेष जांच घर में जांच कराने के लिए भेजा जाता है. कई मरीजों ने बताया कि सदर अस्पताल में सुविधा देने की जगह मरीजों को परेशान किया जाता है. जबकि सिविल सर्जन डॉ शिवेंद्र कुमार सिन्हा ने इन बात से इनकार किया. उनका कहना है कि सभी जांच केंद्रों पर मरीजों की जांच की जाती है. अस्पताल प्रबंधन मरीजों की सुविधा का हर संभव प्रयास करता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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