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आरा के चार रैन बसेरों में दो पर कब्जा, बेघर और जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा सहारा

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आरा के चार रैन बसेरों में दो पर कब्जा, बेघर और जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा सहारा
सदर अस्पताल स्थित रैन बसेरा

Arrah News (नरेंद्र प्रसाद सिंह की रिपोर्ट)
बेघर और जरूरतमंद लोगों को आश्रय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा बनाए गए रैन बसेरों का लाभ पात्र लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है. नगर क्षेत्र में संचालित चार रैन बसेरों में से दो पर कब्जे की स्थिति बताई जा रही है, जबकि शेष दो रैन बसेरों में भी उपयोगिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में गरीबों के लिए शुरू की गई यह व्यवस्था अपने उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है.

दो रैन बसेरों पर कब्जे का आरोप

नगर निगम क्षेत्र में सदर अस्पताल, मौलाबाग, गांगी और अनाईठ में रैन बसेरों का निर्माण कराया गया है. इनमें सदर अस्पताल और मौलाबाग स्थित रैन बसेरों में लोगों के ठहरने की व्यवस्था है. वहीं गांगी स्थित रैन बसेरा असामाजिक तत्वों के कब्जे में होने की बात कही जा रही है, जिससे जरूरतमंद लोग वहां जाने से कतराते हैं. दूसरी ओर अनाईठ का रैन बसेरा भी पूरी तरह निगम के नियंत्रण में नहीं बताया जा रहा है और उसका उपयोग निजी कार्यों में किए जाने का आरोप है.

रजिस्टर में नाम, लेकिन कम दिखते हैं लाभार्थी

रैन बसेरों के संचालन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि रजिस्टर में नाम दर्ज होने के बावजूद वास्तविक रूप से बहुत कम लोग इनका उपयोग करते हैं. औसतन प्रतिदिन दो से तीन लोगों के ठहरने की ही एंट्री दर्ज होती है. कई बार रजिस्टर में नाम तो दर्ज रहते हैं, लेकिन संबंधित दस्तावेज या अन्य जानकारी उपलब्ध नहीं रहती, जिससे व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

प्रचार-प्रसार के अभाव में योजना से अनजान लोग

स्थानीय लोगों का कहना है कि रैन बसेरों के बारे में व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं किया जाता. इसके कारण बड़ी संख्या में जरूरतमंद और बेघर लोगों को इन सुविधाओं की जानकारी ही नहीं मिल पाती. नतीजतन लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई व्यवस्था का अपेक्षित लाभ समाज के कमजोर तबके तक नहीं पहुंच पा रहा है.

निगरानी और जांच की उठी मांग

लोगों का कहना है कि रैन बसेरों की नियमित जांच नहीं होने से कई तरह की अनियमितताओं को बढ़ावा मिल रहा है. उन्होंने नगर निगम प्रशासन से सभी रैन बसेरों की स्थिति की जांच कराने, कब्जा हटाने और इनके प्रभावी संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि योजना का लाभ वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सके.

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विकाश झा एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार और कंटेंट प्रोफेशनल हैं, जिन्हें मीडिया, डिजिटल कंटेंट और सोशल मीडिया कम्युनिकेशन के क्षेत्र में छह वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह प्रभात खबर में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन में स्नातक और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 2020 में भोपाल से हुई, जिसके बाद उन्होंने ETV Bharat, Bharat Express और News24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में विभिन्न जिम्मेदार भूमिकाओं का निर्वहन किया। News24 से आगे बढ़ते हुए उन्होंने Adglobal360 India Pvt. Ltd. के माध्यम से बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) में कंटेंट राइटर के रूप में कार्य किया। स्पोर्ट्स, हाइपरलोकल और पॉलिटिकल पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं। क्रिकेट के प्रति उनका गहरा लगाव है और वे क्रिकेट को सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि अपनी लेखनी का महत्वपूर्ण विषय मानते हैं। उन्हें यात्रा करना, नए लोगों और स्थानों को जानना तथा समाज और राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले विकाश डिजिटल मीडिया की तेज रफ्तार दुनिया में तथ्यों पर आधारित, प्रभावशाली और पाठक-केंद्रित कंटेंट तैयार करने के लिए जाने जाते हैं।
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