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श्रीमद्भागवत कथा से वातावरण भक्तिमय

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श्रीमद्भागवत कथा से वातावरण भक्तिमय

कुर्साकांटा. प्रखंड क्षेत्र के कुआड़ी बाजार स्थित मोतीलाल अतिथि सदन में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन वृंदावन के कथा वाचक प्रेमदूत राजीव ठाकुर जी महाराज ने कहा कि यह संसार भगवान का एक सुंदर बगीचा है. यहां चौरासी लाख योनियों के रूप में भिन्न- भिन्न प्रकार के फूल खिले हुए हैं. जब-जब कोई अपने गलत कर्मों द्वारा इस संसार रूपी भगवान के बगीचे को नुकसान पहुंचाने की चेष्टा करता है तब-तब भगवान इस धरा धाम पर अवतार लेकर सज्जनों का उद्धार व दुर्जनों का संहार करने को लेकर अवतरित होते रहे हैं. कथा वाचक ने सती चरित्र, ध्रुव चरित्र व समुद्र मंथन प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया. जिससे श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए. कथावाचक ने सती चरित्र के माध्यम से त्याग, आत्मसम्मान व सत्य के प्रति अडिग रहने का संदेश दिया. बताया कि माता सती ने भगवान शिव के अपमान को सहन न करते हुए अपने प्राणों का त्याग कर दिया था. ध्रुव चरित्र का उल्लेख करते हुए महाराज जी ने बालक ध्रुव की अटूट भक्ति, कठोर तपस्या व दृढ़ संकल्प पर प्रकाश डाला. संत ने बताया कि सच्ची श्रद्धा से भगवान की कृपा अवश्य प्राप्त होती है व असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं. समुद्र मंथन प्रसंग सुनाते हुए कथावाचक ने देवताओं व दानवों के संयुक्त प्रयास, हलाहल विष के प्रकट होने से लेकर अमृत प्राप्ति तक की कथा का वर्णन किया. इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने जीवन में धैर्य, संघर्ष, सहयोग व सकारात्मक सोच के महत्व को समझाया. श्रीमद्भागवत कथा को लेकर कुआड़ी बाजार का वातावरण भक्तिमय बना रहा.

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