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Home बिहार अररिया किसानों को लुभा रहा मक्का, गेहूं के प्रति हो रहा मोहभंग

किसानों को लुभा रहा मक्का, गेहूं के प्रति हो रहा मोहभंग

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किसानों को लुभा रहा मक्का, गेहूं के प्रति हो रहा मोहभंग

एक एकड़ में मक्का व गेहूं के पैदावार में भारी अंतर

फोटो:31- खेत में लहलहाती मक्का की फसलें. प्रतिनिधि, भरगामा

भरगामा व आसपास का क्षेत्र गेहूं की खेती के लिए अनुकूल माना जाता है. लेकिन मौसम के बदले मिजाज के असर से निर्धारित लक्ष्य से काफी कम मात्रा में इस वर्ष गेहूं की बोआई हो पायी है. क्षेत्र के किसानों का झुकाव मक्का खेती की तरफ ज्यादा देखा जा रहा है. जिधर देखें उधर ही मक्के की फसल लहलहाती नजर आती है. यह इलाका गेहूं उत्पादन के लिए मशहूर माना जाता है लेकिन पिछले कुछ वर्षो से मौसम की बेरूखी व जमीन की उपज क्षमता में बदलाव के बीच इलाके में बढ़ते उत्पादन लागत, खाद, बीज, कीटनाशक व महंगी सिंचाई व्यवस्था के कारण यह खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा बनती जा रही है. प्रशासनिक स्तर से भी किसानों प्रोत्साहन व मदद नहीं मिलने के कारण सोने जैसी चमक रखने वाली गेहूं के दाने किसानों को नही लुभा पा रहे है. फलतः अब किसान गेहूं को छोड़ मक्का की खेती पर ज्यादा देने लगे है.

बाजार में गेहूं से ज्यादा बिक रहे हैं मक्का के बीज

किसानों की माने तो गेंहू की खेती में अधिक लागत व ऊपर से अनेकों परेशानी ने ऐसी विवशता पैदा कर दी है कि लोग गेहूं की खेती से विमुख होते जा रहे हैं. शायद यही वजह है कि बाजार में खाद बीज के कारोबारियों ने भी किसानों की मनोस्थिति भांप ली है व मक्का बीज की वेरायटी से समूचा बाजार पटा हुआ है. वही गेंहू के संबंध में कारोबारी बताते हैं कि पिछले वर्ष गेहूं बीज की बिक्री कम होने से नुकसान उठाना पडा था. बल्कि इस बार भी गेहूं बीज खरीददार काफी कम आया. लोग अब घरेलू बजट के हिसाब से हीं इसकी खेती इस बार किये है. ज्यादातर लोग इस बार मक्का के बीज ही खरीदे हैं. स्थिति यह रही इस बार की जोर शोर से लोग मक्का की बुआई करते नजर आये.

किसानों ने कहा

गेंहू की खेती से विमुख होने के कारण बताते हुए सीमावर्ती गोबिंदपुर गांव के बासुदेव मंडल, पैकपार के किसान प्रमोद सिंह, रामपुर के बंटी सिंह, अमर चौहान, मुन्ना यादव कहते है कि अब न तो बीज की प्रमाणिकता उचित रही साथ ही रासायनिक खाद की बढ़ती कीमतों ने किसानों का हौसला पस्त कर दिया है. वहीं जहां एक एकड़ मे मक्का 50 क्विंटल तक हो जाता है वही गेंहू औसत पैदावार 10 से 12 क्विंटल भी एकड़ नहीं होती है. जबकि बाजार में दोनों की कीमत में लगभग समानता है.

निर्धारित लक्ष्य से ज्यादा हो रही मक्के की खेती गेहू व मक्का की खेती के संबंध में प्रखंड कृषि पदाधिकारी नागेंद्र राम ने बताया कि इस इलाके का मौसम जिस हिसाब से परिवर्तित हो रहा है. उससे गेंहू की फसल में बढ़ोतरी प्रभावित हो रही है. हालांकि इसकी खेती पर जोर दिया जा रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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