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Home बिहार अररिया विश्व पर्यावरण दिवस पर जोगबनी ICP परिसर में SSB ने 500 फलदार व छायादार पौधे रोपे

विश्व पर्यावरण दिवस पर जोगबनी ICP परिसर में SSB ने 500 फलदार व छायादार पौधे रोपे

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विश्व पर्यावरण दिवस पर जोगबनी ICP परिसर में SSB ने 500 फलदार व छायादार पौधे रोपे
कार्यक्रम के बाद उपस्थित लोग
जोगबनी (अररिया) से सुदीप भारती की रिपोर्ट

World Environment Day: पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने और सीमावर्ती क्षेत्रों को प्रदूषण मुक्त व हरित गलियारे के रूप में विकसित करने के संकल्प के साथ शुक्रवार को आईसीपी जोगबनी (ICP Jogbani) में ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ धूमधाम से मनाया गया. इस खास मौके पर सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 56वीं बटालियन द्वारा एक वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. अभियान का विधिवत उद्घाटन एसएसबी के सेनानायक (कमांडेंट) नितिन कुमार गुप्ता और आईसीपी के लैंड पोर्ट प्रबंधक रत्नाकर यादव ने संयुक्त रूप से किया. इस महा-अभियान में सीमा पर तैनात विभिन्न केंद्रीय सुरक्षा और जांच एजेंसियों के 100 से अधिक अधिकारियों व कर्मचारियों ने कुदाल थामकर श्रमदान किया.

लीची का पौधा लगाकर हुई शुरुआत; रोपे गए आम, जामुन और कटहल

  • मुख्य अतिथि का अभिनंदन: कार्यक्रम की शुरुआत में आईसीपी जोगबनी के प्रबंधक रत्नाकर यादव ने मुख्य अतिथि एसएसबी कमांडेंट नितिन कुमार गुप्ता को पुष्पगुच्छ (बुके) भेंट कर उनका स्वागत किया.
  • सांकेतिक शुरुआत: इसके तुरंत बाद दोनों शीर्ष अधिकारियों ने आईसीपी के मुख्य प्रशासनिक भवन के लॉन में लीची का पौधा रोपित कर इस अभियान की आधिकारिक शुरुआत की.
  • 500 पौधों का गणित: इस अभियान के तहत पूरे खाली पड़े भूभाग और सुरक्षा घेरे के पास कुल 500 फलदार और छायादार पौधे रोपे गए, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
    • आम: 250 पौधे
    • लीची: 75 पौधे
    • जामुन: 50 पौधे
    • कटहल: 50 पौधे
    • अन्य छायादार प्रजातियां: 75 पौधे

सामूहिक भागीदारी: इमिग्रेशन, कस्टम और हेल्थ यूनिट ने भी बढ़ाया हाथ

अंतर-विभागीय समन्वय की अनूठी मिसाल: इस पर्यावरण उत्सव की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें केवल सुरक्षा बल ही नहीं, बल्कि भारत-नेपाल सीमा व्यापार और आवाजाही से जुड़े सभी महकमों ने एक साथ कदम बढ़ाया. कार्यक्रम में एसएसबी के जवानों के साथ-साथ प्लांट क्वारेंटाइन (सीमा वनस्पति निरीक्षण), इमिग्रेशन (आप्रवासन विभाग), सीमा सीमा शुल्क (Customs), केंद्रीय स्वास्थ्य इकाई (Health Unit) सहित आईसीपी के सभी तकनीकी विभागों के 100 से अधिक अधिकारी, कर्मचारी और स्थानीय हितधारकों (Stakeholders) ने पूरे उत्साह के साथ गड्ढे खोदे और पौधरोपण किया.

जलवायु परिवर्तन से निपटने का सबसे प्रभावी हथियार; पक्षियों को मिलेगा सुरक्षित आश्रय

  • अधिकारियों का संदेश: इस मौके पर उपस्थित पर्यावरणविदों और अधिकारियों ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण का संरक्षण किसी एक विभाग या एक दिन का काम नहीं है, बल्कि यह पूरी मानव जाति की सामूहिक जिम्मेदारी है. वर्तमान में वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे तापमान (ग्लोबल वॉर्मिंग), असमय जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण से निपटने के लिए सघन वृक्षारोपण ही सबसे सरल और प्रभावी वैज्ञानिक तरीका है. एक परिपक्व पेड़ न केवल हमें जीवनदायिनी ऑक्सीजन देता है, बल्कि भूजल स्तर को सुधारने और जैव विविधता को बनाए रखने में भी मदद करता है.

दीर्घकालिक संरक्षण का संकल्प और वर्तमान स्थिति:

जोगबनी आईसीपी प्रबंधन ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह अभियान केवल कागजी या फोटो खिंचवाने तक सीमित नहीं रहेगा. प्रबंधन ने एक व्यावहारिक रोडमैप तैयार किया है, जिसके तहत लगाए गए सभी 500 पौधों की ट्री-गार्ड से घेराबंदी की जाएगी और उनकी दैनिक सिंचाई व सुरक्षा के लिए विशेष कर्मियों की ड्यूटी लगाई जाएगी.

इस दीर्घकालिक योजना का मुख्य लक्ष्य पूरे कंक्रीट परिसर को एक प्राकृतिक फलदार और छायादार वन के रूप में तब्दील करना है, ताकि भविष्य में यहाँ इंसानों के साथ-साथ स्थानीय पक्षियों और अन्य छोटे जीवों को भी सुरक्षित बसेरा और प्राकृतिक भोजन मिल सके. कार्यक्रम के समापन पर सीमा पर तैनात सभी अधिकारियों, जवानों और कर्मचारियों ने एक सुर में इन पौधों को पूर्ण वृक्ष बनाने तक उनकी रक्षा करने की कसम खाई.

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