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Home बिहार अररिया गुरु का महत्व सबसे बड़ा है उसकी बराबरी कोई नहीं कर सकता: साध्वी स्वर्ण रेखा

गुरु का महत्व सबसे बड़ा है उसकी बराबरी कोई नहीं कर सकता: साध्वी स्वर्ण रेखा

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गुरु का महत्व सबसे बड़ा है उसकी बराबरी कोई नहीं कर सकता: साध्वी स्वर्ण रेखा

साध्वी स्वर्ण रेखा के सान्निध्य में मनाया गया तेरापंथ स्थापना दिवस फोटो:-6- कार्यक्रम के दौरान साध्वीश्री के साथ ज्ञानशाला के बच्चे. प्रतिनिधि, फारबिसगंज जैन श्वेतांबर तेरापंथ के महासूर्य आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी सुशिष्या साध्वी स्वर्ण रेखा जी ठाणा चार के सानिध्य में स्थानीय तेरापंथ भवन में तेरापंथ स्थापना दिवस व मंत्र दीक्षा का कार्यक्रम सानंद संपन्न हुआ. कार्यक्रम की शुभ शुरुआत स्थानीय युवक परिषद की टीम के द्वारा मंगलाचरण से किया गया. तत्पश्चात सभा के अध्यक्ष महेंद्र बैद ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज हम गर्व से सीना तानकर कहते हैं कि हम तेरापंथी है तो यह सब आचार्य भिक्षु की ही देन है. आचार्य भिक्षु ने खुद कंटीली पगडंडियों को पार किया. हमें इतना सुरम्य सुंदर भैक्षव शासन दिया. खुद हलाहल का पान किया व हमें अमृत जैसा तेरापंथ संघ प्रदान किया. सभी अभिभावक गण को जिनके बच्चे 05 वर्ष से 13 वर्ष के बच्चों को ज्ञानशाला में भेजने की अपील की. तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष आशीष गोलछा ने बतलाया कि अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद सेवा संगठन व संस्कार जैसे आयामों को लेकर आगे बढ़ रही है. जिसमें संस्कार निर्माण के रूप में ज्ञानशाला के बच्चों में मंत्र दीक्षा एक प्रमुख कार्यक्रम है. साध्वी स्वर्ण रेखा जी ने अपने मंगल उद्बोधन में बतलाया कि गुरु अपने जीवन में क्या महत्व रखते हैं. गुरु ऐसे होते हैं जो अपने अज्ञान से भरी अंधेरी दिल रूपी गुफा में प्रवेश करके ज्ञान रूपी दीपक जला सकते हैं. गुरु का महत्व सबसे बड़ा है. उसकी बराबरी कोई नहीं कर सकता. आज गुरु पूर्णिमा का दिन है हम सभी अपने गुरु आचार्य श्री भिक्षु से लेकर आचार्य श्री महाश्रमणजी तक के सभी गुरुओं को वंदन करते हैं. आज ही के दिन हमारे प्रथम गुरु आचार्य भिक्षु ने केलवा के अंधेरी ओरी नामक स्थान में भाव दीक्षा ग्रहण की थी. तेरापंथ धर्मसंघ की नींव डाली. तभी से आज का दिन तेरापंथ स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है. आचार्य भिक्षु के बलिदानों के कारण ही आज भी तेरापंथ संघ प्राणवान और ऊर्जावान है. गुरु तुलसी के अनेक अवदानों में एक अवदान है ज्ञानशाला. अगर हमें अपना व अपने बच्चों का कल सुरक्षित रखना है तो बच्चों में संस्कार निर्माण पर ध्यान देना बहुत ही आवश्यक है. मौके पर मंच का कुशल संचालन स्थानीय तेरापंथ युवक परिषद के मंत्री पंकज नाहटा के द्वारा किया गया.

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