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Home बिहार अररिया वट सावित्री पूजा में सुहागिन महिलाएं रखेंगी अखंड सौभाग्य का व्रत

वट सावित्री पूजा में सुहागिन महिलाएं रखेंगी अखंड सौभाग्य का व्रत

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वट सावित्री पूजा में सुहागिन महिलाएं रखेंगी अखंड सौभाग्य का व्रत

पति की लंबी उम्र व परिवार की सुख-समृद्धि के लिए करेंगी पूजा-अर्चना

सिमराहा. पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य व परिवार की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर जिले सहित ग्रामीण इलाके में सुहागिन महिलाएं शनिवार को वट सावित्री पूजा करेंगी. महिलाएं सोलह श्रृंगार कर वट वृक्ष की पूजा-अर्चना करेंगी. पति की लंबी उम्र व संतान की कुशलता के लिए निर्जला उपवास रखेंगी. इसे लेकर शुक्रवार को ग्रामीण बाजारों में भी रौनक देखा जा रहा है. सुहागिन महिलाएं पूजा सामग्री जैसे बांस से बना पंखा, कच्चा सुता, आम, लीची व शृंगार का समान खरीदते देखी गयीं. मालूम हो कि वट सावित्री पूजा को लेकर जिले के विभिन्न मंदिरों व वट वृक्षों के समीप पूजा को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं. शनिवार को सुबह से ही वट वृक्षों के पास सुहागिन महिलाओं की भीड़ उमड़ेगी. पुजारियों द्वारा वेद-वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच सावित्री-सत्यवान की कथा सुनाई जाएगी. महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर कच्चा सूत बांधते हुए 108 बार परिक्रमा करेंगी व अखंड सौभाग्य की कामना करेंगी. ज्योतिषाचार्य पंडित पदमानंद झा के अनुसार बरगद व पीपल वृक्ष की पूजा से शनि, मंगल व राहु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं. वट वृक्ष के नीचे सावित्री-सत्यवान की कथा सुनना अत्यंत शुभ माना गया है.

सावित्री ने बचाए थे सत्यवान के प्राण

पौराणिक मान्यता के अनुसार माता सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा के लिए यह व्रत रखा था. उनकी तपस्या व दृढ़ संकल्प से प्रसन्न होकर यमराज ने सत्यवान को पुनर्जीवन दिया था. तभी से सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य व पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखती हैं. धार्मिक मान्यता है कि वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु व शाखाओं-पत्तियों में भगवान शिव का वास होता है. इसी कारण महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर उसके चारों ओर धागा बांधती हैं.

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