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अररिया में डाॅल्फिन रिसर्च सेंटर स्थापित होने से बढ़ेगा आकर्षण

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अररिया में डाॅल्फिन रिसर्च सेंटर स्थापित होने से बढ़ेगा आकर्षण

अररिया. जिला गंगा समिति सदस्य दक्षिणेश्वर प्रसाद राय ने भूपेंद्र यादव, केंद्रीय वन पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन मंत्री भारत सरकार, बिहार सरकार के मंत्री प्रेम कुमार को पत्र लिखकर बिहार के अररिया में डाॅल्फिन रिसर्च सेंटर स्थापित करने की मांग के साथ साथ इसके संरक्षण के लिए समुचित उपाय करने की बात कही है. उन्होंने बताया कि डाॅल्फिन मुख्यतः गांगेय इलाकों या फिर उसकी सहायक नदियों में रहना पसंद करती है. चूंकि यह साफ पानी में रहना ज्यादा पसंद करती है. इसलिए डाॅल्फिन प्रदूषण मुक्त नदियों में अपना निवास स्थल बनाती है. विचरण करती है. हमारे लिए यह गर्व की बात है की अररिया के परमान व उसकी सहायक नदियों में अच्छी खासी संख्या में इसकी मौजूदगी है. लेकिन नदी के तटीय इलाकों में अवैध बालू व मिट्टी खनन हमारे लिए चिंता का विषय है. साथ ही नदी के तटीय इलाकों के ग्रामीणों को इसकी सुरक्षा के लिए जागरूक करना भी अति आवश्यक है. जबकि भारत सरकार व बिहार सरकार का सख्त निर्देश प्रत्येक जिला खनन पदाधिकारी को दिया हुआ है. जहां जिस जिले की नदियों व सहायक नदियों में डाॅल्फिन रहती है. वहां किसी भी सूरत में नदी के तटीय इलाकों में अवैध खनन नहीं होना चाहिए. बीते कुछ सालों कुछेक अंतराल पर डाॅल्फिन मैन के नाम से मशहूर आर के सिन्हा के नेतृत्व में जूलॉजिकल सर्वे भी किया गया है. ये सर्वे अबतक तीन बार किया जा चुका है. जिसमें डाॅल्फिन के संरक्षण व इसके अभयारण्य स्थल की व्यवस्था को व्यवस्थित करना सुनिश्चित है. अररिया में अगर डाॅल्फिन रिसर्च सेंटर की स्थापना की जाती है तो काफी अहम होगा. नदियों की जैव विविधता बनाए रखने में डाॅल्फिन की अहम भूमिका होती है. ऐसे में अगर अररिया में डाॅल्फिन रिसर्च सेंटर की स्थापना की जाती तो जिले के साथ ही देश व बिहार के अनेक हिस्सों से डाॅल्फिन पर रिसर्च करने वालों के लिए बड़ी सौगात होगी. विलुप्त होते इस राष्ट्रीय जलीय जीव के सुरक्षा, संरक्षण व संवर्धन पर फोकस बढ़ेगा व साथ हीं पर्यटकों का ध्यान भी इधर आयेगा. दक्षिणेश्वर ने बताया अररिया निवासी व देश के प्रसिद्ध पर्यावरण सुदन सहाय जी के मार्गदर्शन में वे बीते कुछ सालों से परमान नदी व उसकी सहायक नदियों में डाॅल्फिन के संरक्षण व इसके स्थायी निवास स्थान के बारे में सूक्ष्मता से अध्ययन कर रहे हैं. दक्षिणेश्वर ने बताया की डाॅल्फिन मछली अंडा नहीं देती है. बल्कि एक मादा एक से चार बच्चों को जन्म देती है. हमें गर्व होना चाहिए कि हमारे जिले के नदियों में डाॅल्फिन मछलियां रहती हैं. दक्षिणेश्वर ने बताया कि अररिया में डाॅल्फिन रिसर्च सेंटर की स्थापना के लिए वे पत्र भेजने के साथ हीं जुलाई महीने में दिल्ली जाकर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौपेंगे.

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