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फारबिसगंज को जिला बनाने की मांग तेज

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फारबिसगंज को जिला बनाने की मांग तेज

फारबिसगंज. फारबिसगंज को जिला बनाने की मांग स्थानीय लोगों व जनप्रतिनिधियों द्वारा लंबे समय से की जा रही है. सामरिक दृष्टिकोण से भारत-नेपाल सीमा पर बसा फारबिसगंज का एक लंबा इतिहास रहा है. ऐतिहासिक ली अकादमी हाइस्कूल के 100 साल हो गये हैं. फारबिसगंज नगर परिषद की स्थापना कई वर्षों पहले हुई थी. फारबिसगंज सीमांचल का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र है. अररिया जिले के गठन के बाद से ही इसे अनुमंडल बनाया गया था. यह मांग इलाके के विकास को गति देने व प्रशासनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए उठती रही है. एक समय धान व जूट का उत्तर बिहार का सबसे बड़ा मंडी हुआ करता था. हालांकि समय के साथ फारबिसगंज में जो विकास होना चाहिये. वह अबतक नहीं हुआ. इसको देखते हुए फारबिसगंज को जिला बनाने की मांग विभिन्न संगठनों, राजनीतिक दलों सहित समाजसेवी लगातार करते रहे हैं.

फारबिसगंज भारत-नेपाल सीमा पर स्थित महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र

चुनाव के दौरान व विभिन्न विकास परियोजनाओं के शिलान्यास के समय इसे प्रमुखता से उठाया जाता है, ताकि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर व सुविधाओं के साथ इसे एक पूर्ण जिला का दर्जा मिल सके. लेकिन समय गुजरने के साथ इस मुद्दे को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है. फारबिसगंज भारत-नेपाल सीमा पर स्थित एक पुराना व महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र है. जो व्यापारिक व शैक्षणिक गतिविधियों का केंद्र हमेशा से रहा है. इस अनुमंडल को जिला का दर्जा मिलना चाहिये.

ई आयुष अग्रवाल,

राजद नेता व समाजसेवी

लोगों को अपने काम के लिए 30-50 किमी का करना पड़ता है सफर

अररिया जिला का गठन 14 जनवरी 1990 में हुआ. अररिया को जिला बनाया गया व फारबिसगंज को अनुमंडल का दर्जा मिला. इसके बाद से ही फारबिसगंज को जिले के रूप में विकसित करने की मांग जोर पकड़ने लगी थी. जिला का दर्जा मिलने से यहां डीएम, एसपी जैसे उच्च अधिकारियों के आवास, पुलिस लाइन व अन्य प्रशासनिक भवनों का निर्माण हो सकेगा. इससे स्थानीय प्रशासन व सुविधाओं में सुधार होगा. लोगों को अपने काम के लिए आज 30-50 किलोमीटर का सफर अररिया जिला करना पड़ता है. विकास के दृष्टिकोण से फारबिसगंज का जिला बनना अतिआवश्यक है. फारबिसगंज का जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान डायट में जितना भूभाग है. उसका विकास अतिआवश्यक है.

चांदनी सिंह,

महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष, भाजपा

फारबिसगंज का कई इलाका आज भी विकास से अछूता

फारबिसगंज को जिला बनाने की मांग करते हुए बिहार सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया है. उन्होंने कहा जिला बनने से क्षेत्र में सुनियोजित विकास होगा. ग्रामीण क्षेत्रों में भी शहरी नागरिक सुविधाओं के साथ बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे ड्रेनेज, अंडरपास, प्रोसेसिंग यूनिट आदि की मांग भी पूरी हो सकेगी. फारबिसगंज का कई इलाका आज भी विकास से अछूता है. लोगों को अपने कार्य के लिए जिला मुख्यालय के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. सिमराहा, खवासपुर, कुशमाहा को प्रखंड का दर्जा मिलना चाहिए.

पूजा केसरी,

मुखिया सह समाजसेवी, कुशमाहा पंचायत

फारबिसगंज को जिला बनाने की मांग लंबे समय से अधर में है लटकी

फारबिसगंज को जिला बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, जो अधर में लटकी हुई है. फारबिसगंज में एक बड़ी बाजार समिति के निर्माण व विभिन्न विकास परियोजनाओं जैसे रेलवे ओवरब्रिज, फ्लाइओवर का शिलान्यास हुआ है, जो शहर के विकास को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में फारबिसगंज का अपना महत्व रहा है. स्थानीय जनप्रतिनिधि भी शिक्षा, स्वास्थ्य व इंफ्रास्ट्रक्चर में विकास के दावे करते हैं व जिले के दर्जे की मांग को उठाते रहना चाहिये.

आदर्श गोयल,

युवा व्यवसायी सह समाजसेवी

फारबिसगंज को जिला व सिमराहा को प्रखंड मिले प्रखंड का दर्जा

फारबिसगंज को जिला व सिमराहा को प्रखंड को दर्जा मिलना ही चाहिये. आंचलिक साहित्यिक फणिश्वरनाथ रेणु की जन्मस्थली सिमराहा को प्रखंड का दर्जा मिलने से विकास की गति और तेज होगी. फारबिसगंज को जिला बनाने की मांग सिर्फ प्रशासनिक दर्जा पाने की नहीं, बल्कि इस क्षेत्र के सर्वांगीण विकास, बेहतर कनेक्टिविटी व लोगों को स्थानीय स्तर पर सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने की है. यह मांग समय-समय पर उठती रहती है. इस पर मुख्यमंत्री सहित स्थानीय विधायक, सांसद को ध्यान देना चाहिये.

कपिल अंसारी,

समाजसेवी सह मुखिया प्रतिनिधि

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