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Home बिहार अररिया टीएएस फेज में पहुंचा अररिया

टीएएस फेज में पहुंचा अररिया

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टीएएस फेज में पहुंचा अररिया

अररिया. जिले में फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम बेहद सफल साबित हो रहा है. बहुत जल्द अररिया देश के फाइलेरिया से पूरी तरह मुक्त जिलों की सूची में शामिल हो सकता है. राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत प्री ट्रांसमिशन असेस्मेंट सर्वे यानी प्री-टीएएस फेज को क्वालिफाई कर ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे फेज में पहुंच चुका है. ये उपलब्धि हासिल करने वाला अररिया राज्य के गिने-चुने जिलों की सूची में शामिल है. इस वर्ष फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत ट्रांसमिशन असेसमेंट फेज में पहुंचने वाला अररिया राज्य के एक मात्र जिला है. ट्रांसमिशन अस्समेंट सर्वे में क्वालिफाई होने के बाद अररिया फाइलेरिया इलीमिनेशन फेज में पहुंच जायेगा. वहीं फाइलेरिया मुक्त जिला के रूप में प्रमाणीकरण प्राप्त करने के बेहद करीब होगा. जानकारी मुताबिक किसी जिले में लगातार पांच सालों तक एडीए राउंड संचालित होने के बाद उक्त जिले में प्री ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे फेज संचालित किया जाता है. इससे इतर अररिया में एमडीए राउंड इतना प्रभावी तौर पर संचालित किया गया कि महज चार साल एमडीए राउंड संचालित होने के बाद ही ये प्री ट्रांसमिशन असेस्मेंट सर्वे फेज में पहुंच गया. बेहतर रणनीति, सामूहिक प्रयास के दम पर अपने पहले प्रयास में ही अररिया इस फेज को क्वालिफाई करने में सफल रहा. बीते वर्ष 2023 में जून व नवंबर महीने में संभावित फाइलेरिया मरीजों की खोज के लिए जिले में नाइट ब्लड सर्वे अभियान का संचालन किया गया. जून में संचालित सर्वे में रानीगंज के धामा पंचायत में फाइलेरिया के महज दो संभावित मरीज मिले. नवंबर महीने में संचालित अभियान के क्रम में 10 हजार से अधिक लोगों जांच में फाइलेरिया के एक भी मरीज नहीं मिले. इस महत्वपूर्ण उपलब्धी के साथ ही अररिया इस वर्ष ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वें फेज में पहुंचने वाला राज्य का एक मात्र जिला है. जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ अजय कुमार सिंह ने बताया कि जिले को पूरी तरह फाइलेरिया मुक्त बनाना विभाग के प्राथमिकताओं में शुमार है. उन्होंने ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे फेज की सफलता के प्रति आश्वस्त करते हुए बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में पूर्व की सफलताओं से हम बेहद उत्साहित हैं. ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे फेज की सफलता को लेकर हमारा प्रयास अभी से शुरू हो चुका है. इसमें फाइलेरिया के संभावित मरीजों का पता लगाने के लिये 06 से 10 वर्ष आयु वर्ग के स्कूली छात्र-छात्राओं की जांच विशेष किट के माध्यम से किया जाना है. किट में फाइलेरिया के मामले चिह्नित होने पर पुन: ऐसे बच्चों का रात्रि कालीन जांच होना है. निर्धारित मानकों के अनुरूप मरीज नहीं मिलने पर हम फाइलेरिया इलीमिनेशन फेज में पहुंच जायेंगे.

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